नवरात्रि में धारण करें कछुआ अंगूठी, बदल जाएगी आपकी किस्मत

सदियों से ज्योतिषशास्त्र व वास्तुशास्त्र का लोगों के जीवन में बहुत महत्व रहा है। ज्योतिष शास्त्र की सलाह से कई लोग हाथ में रत्नों वाली अंगूठी या फिर ब्रेसलेट में या गले की चेन में रत्नों को मढ़वाकर पहनते हैं। ये रत्न भिन्न-भिन्न रंगों के होते हैं। इन्हें पहनने के पीछे का कारण भी जातक की कुंडली के होता है। लेकिन आजकल रत्नों के अलावा भी कई तरह की अंगूठियां लोगों के हाथों में दिखती हैं जिसमें से एक है ‘कछुए वाली अंगूठी’।

कछुआ अंगूठी
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भारत की पौराणिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार कछुआ को भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इसे फेंगशुई में भी महत्वपूर्ण माना गया है। जापानी मान्यता के अनुसार कछुआ को समृद्धि का प्रतीक माना गया है। वहीं भारत में इस अंगूठी को भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी से जोड़कर देखा गया है।

फेंगशुई के अनुसार कछुआ एक बहुत ही शक्तिशाली जीव है। इसे गुड लक के चार स्तम्भों में एक माना गया है। विद्वानों के अनुसार कछुआ पूरी सृष्टि से जुड़ा है। इसका ऊपरी हिस्सा स्वर्ग से और नीचे का भाग धरती से संबंध रखता है।

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कछुए के निकलने से इसे देवी लक्ष्मी का भी प्रिय कहा गया है। धार्मिक मान्यताओं से जुड़े होने के कारण कछुआ अंगूठी पहनने से घर में बरकत होती है। कहा जाता है कि ये बाहरी धन को अपनी ओर खींचता है जिससे ये गरीब को भी राजा बना देता है।

कछुए को स्वर्ग व धरती से जुड़ा माना जाता है इसलिए इसे पहनने से ये आस-पास का महौल को खुशनुमा बनाता है। ये परिवार के सदस्यों में त्याग और प्रेम की भावना बढ़ाता है, जिससे उनमें मतभेद नहीं होते हैं। कछुआ अंगूठी पहनने से आपसी प्रेम संबंध भी बेहतर होते हैं। ये पति-पत्नी व प्रेमी-प्रेमिका को एक-दूसरे के प्रति आकर्षित करता है। ये आपस में प्यार बढ़ाता है।

कछुआ अंगूठी

साथ ही ये व्यक्ति को अपने पार्टनर के लिए वफादार होने के लिए भी प्रेरित करता है। कछुए को लंबे समय तक जीने वाला प्राणी माना जाता है। इसलिए इसकी अंगूठी को पहनते ही रोग दूर हो जाते है। शरीर में नई ऊर्जा उत्पन्न होती है। विज्ञान के मुताबिक कछुआ अंगूठी पहनने से शरीर के कुछ विशेष नस दबते हैं जिससे शरीर स्वस्थ रहता है।

दरअसल कछुए वाली अंगूठी को वास्तुशास्त्र के भीतर शुभ माना गया है। यह अंगूठी व्यक्ति के जीवन के कई दोषों को शांत करने का काम करती है। लेकिन यदि सबसे अधिक यह किसी बात में सहायक होती है तो वह इसकी वजह से ‘आत्मविश्वास में हो रही बढ़ोत्तरी’। ये व्यक्ति के मन से बुरे व नकारात्मक विचारों को दूर करता है। साथ ही ह्दय में सकारात्मक भावना का संचार करता है। ये जीवन में आगे बढ़ने और तरक्की के लिए प्रेरित करता है। नवरात्रि के समय मां दुर्गा की पूजा के साथ ही अगर कछुआ की अंगूठी धारण किया जाए तो सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।

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कछुआ अंगूठी को करियर के लिए भी अच्छा माना गया है। इसे धारण करते ही सोया हुए भाग्य खुल जाता है। आपके बिगड़े हुए कामों को ठीक करता है और लोगों के दिलों में आपके प्रति सम्मान पैदा करता है। इससे व्यवसाय और नौकरी में सफलता मिलती है। कछुआ अंगूठी हमेशा शुक्रवार को ही खरीदनी और पहननी चाहिए।

इसे पहनने से पहले अंगूठी को दूध में धोना चाहिए। फिर इसे भगवान को स्पर्श कराकर धूप-दीप दिखाना चाहिए। अंगूठी को सीधे हाथ की मध्यमा व तर्जनी उंगली में ही पहनना चाहिए। अंगूठी पहनते वक्त ये ध्यान रखें कि कछुए का मूँह आपकी तरफ होना चाहिए, नही तो धन आने की बजाए चला जाएगा।


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