शारदा चिटफंड घोटाला: यहाँ जानिए क्या है पूरा मामला

कोलकाता में शारदा चिटफंड मामले को लेकर सीबीआई और कोलकाता पुलिस आमने सामने हैं। रविवार को कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने गई सीबीआई टीम को लोकल पुलिस ने न सिर्फ गिरफ्तार कर लिया बल्कि दूसरी ओर कोलकाता पुलिस ने सीबीआई ऑफिस को भी अपने कब्जे में ले लिया है।

यह देश में अपनी तरह का एक अलग हीं मामला है जिसमे लोकल पुलिस ने केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। आइए जानते हैं आखिर क्या है पूरा मामला और कमिश्नर राजीव कुमार का इस केस से क्या संबंध है?

क्या है शारदा चिटफंड घोटाला:

शारदा चिटफंड घोटाला पश्चिम बंगाल का एक बड़ा आर्थिक घोटाला है, जिसमें कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं का हाथ होने का आरोप है। दरअसल पश्चिम बंगाल की चिटफंड कंपनी शारदा ग्रुप ने आम लोगों के ठगने के लिए कई लुभावन ऑफर दिए थे।

शारदा चिटफंड घोटाला
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इस कंपनी ने लोगों से उनके पैसे को 34 गुना करने का वादा किया था और इसके झांसे में आकर जब लोगों ने पैसे जमा कर दिए तो मैच्योरिटी के बाद जब जमाकर्ता अपना रिटर्न लेने पहुंचे तब कंपनियों ने पैसे देने से मना कर दिया। आखिरकार इन कंपनियों ने अपनी दुकानों और दफ्तरों को बंद कर दिया।  दूसरे शब्दों में कहा जाए तो कंपनी ने लोगों से पैसे ठग लिए।

शारदा स्कैम करीब 2500 करोड़ रुपये का है और रोज वैली स्कैम करीब 17,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। रोज वैली ग्रुप चिटफंड घोटाले में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय और तापस पॉल को सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी है। सीबीआई ने रोज वैली के अध्यक्ष गौतम कुंदू और तीन अन्य पर आरोप लगाया था कि उन्होंने देशभर में निवेशकों को 17,000 करोड़ रुपये की चपत लगाई है।

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वहीं शारदा के चेयरमैन सुदीप्त सेन हैं। सेन पर आरोप है कि उन्होंने कथित फ्रॉड करके फंड का गलत इस्तेमाल किया। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई को जांच का आदेश दिया था। साथ ही पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम पुलिस को आदेश दिया था कि वे सीबीआई के साथ जांच में सहयोग करें।

इस कंपनी की स्थापना जुलाई 2008 में की गई थी और देखते ही देखते ये कंपनी सिर्फ 5 साल में हजारों करोड़ की मालिक बन गई। कंपनी पर ये आरोप भी कि इसके मालिक सुदिप्तो सेन ने ‘सियासी प्रतिष्ठा और ताक़त’ हासिल करने के लिए मीडिया में खूब पैसे लगाए और हर पार्टी के नेताओं से जान पहचान बढ़ाई।

राजीव कुमार का क्या है रोल?

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बता दें कि शारदा चिटफंड घोटाले में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार सीबीआई जांच के घेरे में हैं। दरअसल राजीव कुमार ने ही चिटफंड घोटालों की जांच करने वाली एसआईटी टीम की अगुवाई की थी। एसआईटी के अध्यक्ष के तौर पर राजीव कुमार ने जम्मू-कश्मीर में शारदा प्रमुख सुदीप्त सेन और उनके सहयोगी देवयानी को गिरफ्तार किया था और उनके पास से मिली एक डायरी को गायब कर दिया था। इस डायरी में उन सभी नेताओं के नाम थे जिन्होंने चिटफंड कंपनी से रुपए लिए थे।

इस मामले में कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने राजीव कुमार को आरोपित किया था। साथ ही कहा गया था कि इस जांच के दौरान घोटाला हुआ था। इस कमेटी की स्थापना साल 2013 में की गई थी। सीबीआई के मुताबिक घोटाले की जांच से जुड़ी कुछ अहम फाइल और दस्तावेज गायब हैं। वहीं सीबीआई गुम फाइलों और दस्तावेजों को लेकर पुलिस कमिश्नर से पूछताछ करना चाहती है साथ ही सीबीआई ने पुलिस कमिश्नर को फरार बताया था।

क्या होता है चिटफंड

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चिट फंड सेविंग और उधार लेने दोनों का ऑप्शन है। अगर आप बोली नहीं लगाते तो यह आपके लिए आरडी की तरह होगा। चिट टर्म की समाप्ति पर आपको आपका पैसा मिल जाएगा। इसमें रिटर्न का कोई फिक्स फॉर्म्युला नहीं होता। चिटफंड तीन तरह की सुविधाओं का मिश्रण होता है। यह पर्सनल लोन भी है, आरडी भी है और किटी पार्टी भी।


चिटफंड उधार लेने और बचत करने का एक परंपरागत तरीका है। जैसे कि किटी पार्टी में होता है, इसके सभी सदस्य हर महीने कुछ निश्चित रकम डालते हैं और महीने के अंत में कोई एक सदस्य पूरी रकम ले जाता है। जब तक कि सभी सदस्यों को पैसा नहीं मिल जाता, यह प्रक्रिया हर महीने दोहराई जाती है।

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इसमें अंतर केवल यह होता है कि किटी पार्टी में जिस सदस्य को रकम मिलेगी, उसका चुनाव ड्रॉ के जरिए होता है, जबकि चिटफंड में इसका फैसला नीलामी से होता है। जो सदस्य सबसे कम बोली लगाता है, उसे इकट्ठी हुई रकम मिल जाती है। बाकी रकम को सभी सदस्यों के बीच बांट दिया जाता है।


चिंदबरम की पत्नी के खिलाफ भी आरोप पत्र

बता दें कि हाल ही में सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दावा किया है कि चिट फंड घोटाले में घिरे शारदा ग्रुप की कंपनियों से उन्हें 1.4 करोड़ रुपये मिले।

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