नागपंचमी क्यूँ मनाया जाता है, जानिए इस त्योहार से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें

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भारत में हर मौसम में कोई न कोई त्योहार मनाया हीं जाता है। कुछ त्योहार ऐसे होते हैं जिसे मनाने का लॉजिक आजकल के लोगों को भले समझ में न आए लेकिन ऐसे त्योहार फिर भी धूमधाम से मनाए जाते हैं उन्ही में से एक त्योहार है नागपंचमी। जैसा कि नाम से हीं पता चलता है कि इस दिन नागों की पूजा की जाती है।

भविष्य पुराण के अनुसार, सावन महीने में पंचमी दो बार आती है एक कृष्ण पक्ष की और एक शुक्ल पक्ष की। दोनों हीं पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। इस बार 14 जुलाई को कृष्णपक्ष और 27 जुलाई को शुक्ल पक्ष की नागपंचमी मनायी जाएगी। नागपंचमी मनाने के पीछे एक बहुत हीं रोचक किस्सा है।



क्यूँ मनाते हैं नागपंचमी

नागपंचमी
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पाण्डव वंश में अभिमन्यु के पुत्र परिक्षित थे। उन्हे एक ॠषि ने शाप दिया था कि उनकी मृत्यु नाग के डसने से होगी। वह शाप सच हुआ और राजा परिक्षित मृत्यु को प्राप्त हुए। यह देखकर उनके बेटे जनमेजय क्रोधित हो गए और उन्होने पूरे पृथ्वी से समस्त नागों को समाप्त करने का निश्चय कर लिया और इसके लिए उन्होने नाग यज्ञ आयोजित किया। समस्त विश्व से नागों को पकड़-पकड़ कर यज्ञ में डाला जाने लगा।

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इस यज्ञ से पूरे ब्रह्माण्ड में हलचल मच गई तब देवताओं ने राजा जनमेजय से इस यज्ञ को रोकने की प्रार्थना की लेकिन उन्होने देवताओं की बात नही मानी तब देवता आस्तिक मुनि के पास गए और उनसे सारी बातें बतायी। आस्तिक मुनि जो कि एक नाग माता और ॠषि पिता की संतान थे, राजा जनमेजय के पास गए और उनसे आग्रह किया कि वो इस यज्ञ को रोक दें। तब जनमेजय ने उनकी बात मानकर यज्ञ रोक दिया। जिस दिन यज्ञ रोका गया उस दिन पंचमी तिथि थी। इसलिए इस दिन को नागपंचमी के रूप में मनाया जाता है।




दूसरी कहानी के अनुसार, नागों ने अपनी माता कद्रू की आज्ञा का पालन नही किया था तब नाग माता ने उन्हे शाप दिया था कि तुम सभी राजा जनमेजय के नाग यज्ञ में जलकर भस्म हो जाओगे। नागों ने माता से क्षमा याचना की तब माता ने उन्हे ब्रह्मा जी के पास भेजा। ब्रह्मा जी ने उन्हे बताया कि सावन मास की पंचमी तिथि को आस्तिक मुनि उन्हे यज्ञ में जलने से बचाएंगे।

क्यूँ पिलाते हैं नागों को दूध

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आस्तिक मुनि ने राजा जनमेजय के यज्ञ में जले हुए नागों को गाय के दूध से स्नान कराया था जिससे उनके शरीर का दाह दूर हो गया था। इसलिए ऐसा माना जाता है कि नागपंचमी के दिन नागों को दूध से स्नान कराने पर नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है।

पुराणों के अनुसार, नागों के राजा वासुकी ने आस्तिक मुनि के काम से प्रसन्न होकर ये वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति नागपंचमी के दिन नागों की पूजा करेगा और उन्हे दूध पिलाएगा, नाग उन्हे कोई नुकसान नही पहुँचाएंगे। लेकिन साथ हीं उन्होने यह भी कहा था कि नागों और मनुष्यों को एक दूसरे से सुरक्षित रहने के लिए अपना स्थान अलग रखना होगा यानि नाग ऐसी जगह रहेंगे जहा मनुष्य नही रह सके।

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नागपंचमी के दिन क्या करना चाहिए

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बिहार, बंगाल और राजस्थान में नागों को देवता का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। इन जगहों पर सावन के कृष्णपक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी मनायी जाती है। साथ हीं यहाँ ये भी माना जाता है कि इस दिन सर्पगंधा की जड़ी अपने बाजू में बांधने से सांप के काटने का डर दूर होता है।

नागपंचमी के दिन घर के मुख्य द्वार पर गाय का गोबर, दूर्वा, कौड़ी और धान रखकर नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से घर में विषैले जीव घर में प्रवेश नही करते हैं। इसके अलावा इस दिन घर में खीर या कुछ मीठा बनाना और खाना चाहिए और खीर, घी तथा शहद से नागों की पूजा करनी चाहिए।




भविष्य पुराण के पंचमी कल्प में लिखा हुआ है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु सांप के काटने से होती है वह अगले जन्म में विषहीन सांप बनते हैं। इसलिए ऐसा माना जाता है कि नागपंचमी के दिन नागदेवता की पूजा करने से ऐसे लोगों की आत्मा को नाग योनी से मुक्ति मिलती है। पुराणों में ये भी कहा गया है कि जो व्यक्ति सावन की पंचमी तिथि को नाग देवता की पूजा करते हैं और मीठा भोजन करते हैं वह मृत्यु के बाद नागलोक में जाकर सुख भोग प्राप्त करते हैं।


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