खुल गया राज: ISI नहीं, ये है दुनिया की No.1 खुफिया एजेंसी

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किसी भी देश की आंतरिक सुरक्षा में सबसे अहम रोल खुफिया एजेंसियों का होता है। किसी भी शक्तिशाली देश की ताकत इस बात पर निर्भर करती है कि उस देश की खुफिया एजेंसी कितनी मजबूत और ताकतवर है। हर देश में नागरिकों, दस्तावेजों और खुफिया बातों की सुरक्षा की जिम्मेदारी बहुत ही शांत और शातिर तरीकों से खुफिया एजेंसी करती है।

इन एजेंसियों में काम करने वाले लोगों और उनके तरीकों के बारे में किसी को पता नहीं होता है। दुनिया में ऐसी बहुत सी दमदार खुफिया एजेंसी है जो अपने दुश्मनों को धूल चटाने की क्षमता रखती हैं। आइए जानते हैं दुनिया की 7 सबसे शक्तिशाली इंटेलिजेंस एजेंसियों के बारे में, जो दुश्मनों को चकमा देने में माहिर हैं।


दुनिया की Top 7 खुफिया एजेंसी


7) Federal Security Service (FSB)

खुफिया एजेंसी
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रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (एफएसबी) खुफिया एजेंसी है। इसकी स्थापना 12 अप्रैल 1995 को हुई थी। एफएसबी का मुख्यालय मॉस्को में है। एक समय सोवियत रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी को दुनिया की सबसे खतरनाक इंटेलिजेंस एजेंसी माना जाता था लेकिन 1991 में सोवियत रूस के टूकड़े होने के कारण केजीबी को भी खत्म कर दिया गया। बाद में रूस ने 1995 में एफएसबी की स्थापना की लेकिन फिर भी यह मारक क्षमता में केजीबी के आस-पास भी नहीं थी। एफएसबी खुफिया से जुड़े मामलों के अलावा बॉर्डर से जुड़े मामलों पर भी गहरी नजर रखती है।

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6) Inter Services Intelligence (ISI)

खुफिया एजेंसी
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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (इंटर सर्विसेस इंटेलीजेंस) की स्थापना साल 1948 में हुई थी। इसका मुख्यालय इस्लामाबाद के शहराह ए सोहरावर्दी में है। इसकी नींव ऑस्ट्रेलियाई मूल के ब्रिटिश आर्मी ऑफिसर मेजर जनरल आर. कैथोम ने रखी थी, जो उस वक्त पाकिस्तानी आर्मी स्टाफ के मुख्य थे। एक समय ऐसा भी था जब अमेरिकी क्राइम रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआई को दुनिया की सबसे ताकतवर एजेंसी बताया गया था।

लेकिन बाद में आईएसआई का ज्यादातर फोकस सिर्फ भारत पर ही केन्द्रित हो गया जिस कारण इसके ज्यादातर एजेंट्स भारतीय अधिकारियों की गतिविधियों पर ही नजर रखने लगे जिससे विश्व स्तर पर आईएसआई का टॉप का रूतबा खत्म हो गया। आज के समय में विश्व स्तर पर आईएसआई की पहचान एक खुफिया एजेंसी से ज्यादा आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले संगठन के रूप में हो गई है।

5) Ministry Of State Safety (MSS)

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चीन की खुफिया एजेंसी मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सेफ्टी (एमएसएस) को 1983 में बनाया गया था। इसका मुख्यालय बीजींग में है। इस एजेंसी के जिम्मे काउंटर इंटेलिजेंस ऑपरेशंस और विदेशी खुफिया ऑपरेशन्स को चलाना है। चाइनीज खुफिया एजेंसी का इतिहास थोड़ा रहस्यमयी है। इस खुफिया एजेंसी के जासूस भी दुनिया के कोने-कोने में फैले हैं। वैसे तो इस एजेंसी का काम चाइना के हितों की रक्षा के लिए खुफिया सूचनाएं इकट्ठा करना है। लेकिन यह खुफिया एजेंसी दूसरे देशों की टेक्नोलॉजी चुराने के लिए काफी बदनाम हो चुकी है।

4) Research & Analysis Wing (RAW)

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भारत की खुफिया एजेंसी रॉ यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग को दुनिया की ताकतवर खुफिया एजेंसियों में से एक माना जाता है। इसका मुख्यालय दिल्ली में स्थित है। रॉ की स्थापना 1968 में की गई थी। इस एजेंसी की खास बात ये है कि ये भारत के प्रधानमंत्री के अलावा किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है। रॉ विदेशी मामलों, अपराधियों, आतंकियों के बारे में पूरी जानकारी रखती है। वहीं, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) भी देश की सुरक्षा के लिए काम करती है।

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यह उन गिनी चुनी खुफिया एजेंसी में से एक है जो अपने कार्य और ऑपरेशन के लिए सबसे खास मानी जाती है। RAW बारे में सबसे खास बात यह है कि यह अपने ऑपरेशन की सफलता के बावजूद भी ऑपरेशन से जुड़ी बातें गुप्त रखती है जिस कारण दुनिया को इसकी गतिविधियों के बारे में बहुत कम ही पता चलता है।

3) Military Intelligence Section-6 (MI6)

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यूनाइटेड किंगडम की मिलिट्री इंटेलिजेंस सेक्शन-6 (MI6) खुफिया एजेंसी है। सबसे पुरानी खुफिया एजेंसियों में से एक MI6 की स्थापना 1909 में की गई थी। इसका मुख्य काम डिफेंस और सरकार के साथ जानकारी साझा करना है लेकिन साथ ही देश की संस्थाओं पर नजर रखने का काम भी MI6 के जिम्मे ही है। जेम्स बांड की कई मूवी इसी एजेंसी द्वारा किए गए खुफिया ऑपरेशन पर ही बनी है। MI-6 ब्रिटिश महारानी के अंडर में काम करती है। इस एजेंसी को सबसे अनुभवी खुफिया एजेंसी माना जाता है।

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2) MOSSAD

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इजराइल की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी मोसाद को सभी खुफिया एजेंसियों का गॉडफादर कहा जाता है। मोसाद की स्थापना 13 दिसम्बर, 1949 को की गई थी। इसका मुख्यालय तेल अवीव में स्थित है। यह एजेंसी दुनिया के कुछ सबसे साहसी अंडरवर्ल्ड ऑपरेशनों में शामिल रही है। मोसाद की प्रमुख जिम्मेदारी खुफिया तरीके से देश की रक्षा करना और आतंकवाद के खिलाफ कार्य करना हे जिसमें यहूदियों को दूसरे देशों से इजराइल वापस लाना भी शामिल है।

मोसाद का मतलब मौत माना जाता है। कहा जाता है कि एक बार जो मोसाद की निगाह में चढ़ गया उसका बचना मुश्किल होता है। यह खुफिया एजेंसी दुनिया भर में फैलें यहुदियों की सुरक्षा के लिए कुछ भी कर सकती है। इस एजेंसी ने एक से एक खतरनाक ऑपरेशन करके दुनिया में अपना अलग ही मुकाम हासिल किया है।

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मोसाद का सबसे चर्चित ऑपरेशन जिसने पूरी दुनिया की सरकारों में सिहरन पैदा कर दिया था वह था रैथ ऑफ गॉड’ (Wrath of God) (खुदा का कहर या फिर भगवान का प्रकोप), जिसे मोसाद ने उन फलीस्तीनी आतंकवादियों से बदला लेने के लिए अंजाम दिया था जिन्होंने 1972 में म्यूनिख ओलिंपिक के लिए इकट्ठा हुए इजरायल ओलिंपिक टीम के 11 खिलाड़ियों को बंधक बनाकर मार दिया था।

इजरायल की सरकार के आदेश पर मोसाद के एजेंट्स अगले 20 सालों तक अपनी पहचान बदलकर दुनिया के अलग-अलग देशों में घूमते रहे और इजरायली खिलाड़ियों को मारने में शामिल रहे सभी आंतकवादियों को मारकर ही वापस अपने देश लौटे। मोसाद के इस ऑपरेशन ने इसे पूरी दुनिया में सबसे खतरनाक इंटेलिजेंस एजेंसी के रूप में स्थापित कर दिया।

1) Central Intelligence Agency (CIA)

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अमेरिका की बहुचर्चित खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) है। 1947 में तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ए ट्रूमैन ने इसकी स्थापना की थी। सीआईए चार हिस्सों में बंटी हुई है। वाशिंगटन के पास वर्जीनिया में इसका मुख्यालय है। सीआईए, डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस को रिपोर्ट करती है। इस खुफिया एजेंसी के लगभाग 30,000 एजेंट है जो कि पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। साइबर क्राइम, आतंकवाद रोकने समेत सीआईए देश की सुरक्षा के लिए काम करती है।

इसके अलावा समय-समय पर सीआईए पर दूसरे देशों की तख्तापलट करवाने का आरोप भी लगता रहा है। सोवियत रूस के साथ शीत युद्ध के समय सीआईए ने रूस की परमाणु मिसाइलों से अमेरिका की सुरक्षा के लिए हर पैंतरे आजमाए थे जिस कारण उस समय सीआईए को सोवियत रूस की तत्कालीन खुफिया एजेंसी केजीबी से ज्यादा ताकतवर माना गया था।


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