जानिए एक वर्ष में कितनी बार आती है नवरात्रि

नवरात्र का उत्सव श्रद्धा और भक्ति का त्यौहार होता है। नवरात्र के दिनों में भक्त देवी मां की उपासना करते हैं और व्रत रखते हैं। माता के इस पावन पर्व में हर कोई उनकी कृपा पाना चाहता है। नवरात्र का यह पावन त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है। इसका भी एक खास महत्व है।

वैसे तो मां दुर्गा की उपासना के लिए सभी समय एक जैसे हैं और दोनों नवरात्रि का प्रताप भी एक जैसा है। साथ ही दोनों नवरात्र में मां की पूजा करने वाले भक्तों को उनकी विशेष अनुकंपा भी प्राप्त होती है। अब सवाल ये उठता है कि

एक वर्ष में कितनी बार आती है नवरात्रि

श्रीराम
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बहुत कम लोगों को हीं पता होगा कि एक साल में 4 नवरात्रि आती है। साल के प्रथम मास चैत्र में पहली नवरात्रि होती है, फिर चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्रि पड़ती है। इसके बाद अश्विन माह में प्रमुख शारदीय नवरात्रि आती है। साल के अंत में माघ माह में गुप्त नवरात्रि होती हैं। इन सभी नवरात्रों का जिक्र देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी किया गया है।

हिंदी कैलेंडर के हिसाब से चैत्र माह से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है, और इसी दिन से नवरात्रि भी शुरू होती है, लेकिन इन चारों में चैत्र और शारदीय नवरात्र प्रमुख माने जाते हैं। एक साल में यह दो नवरात्रि मनाए जाने के पीछे की वजह भी अलग-अलग तरह की है। आइए हम आपको नवरात्रि का उत्सव साल में दो बार मनाने के पीछे आध्यात्मिक, प्राकृतिक और पौराणिक कारणों के बारे में बताते हैं।

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क्या है प्राकृतिक कारण

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नवरात्रि का पर्व दो बार मनाने के पीछे अगर प्राकृतिक कारणों की बात की जाए तो हम पाएंगे कि दोनों नवरात्र के समय ही ऋतु परिवर्तन होता है। गर्मी और शीत के मौसम के प्रारंभ से पूर्व प्रकृति में एक बड़ा परिवर्तन होता है। माना जाता है कि प्रकृति माता की इसी शक्ति के उत्सव को आधार मानते हुए नवरात्रि का पर्व हर्ष, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

ऐसा लगता है कि प्रकृति स्वयं ही इन दोनों समयकाल पर ही नवरात्रि के उत्सव के लिए तैयार रहती है तभी तो उस समय न मौसम अधिक गर्म और न अधिक ठंडा होता है। खुशनुमा मौसम इस पर्व की महत्ता को और बढ़ाता है।

भौगोलिक तथ्य

अगर भोगौलिक आधार पर गौर किया जाए तो मार्च और अप्रैल के जैसे ही, सितंबर और अक्टूबर के बीच भी दिन और रात की लंबाई के समान होती है। तो इस भौगोलिक समानता की वजह से भी एक साल में इन दोनों नवरात्र को मनाया जाता है।

प्रकृति में आए इन बदलाव के चलते मन तो मन हमारे दिमाग में भी परिवर्तन होते हैं। इस प्रकार नवरात्र के दौरान व्रत रखकर शक्ति की पूजा करने से शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है।

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पौराणिक मान्यता

नवरात्रि का त्योहार साल में दो बार मनाए जाने के पीछे प्राचीन कथाओं का उल्लेख भी पुराणों में मिलता है। माना जाता है कि पहले नवरात्रि सिर्फ चैत्र नवरात्र होते थे जो कि ग्रीष्मकाल के प्रारंभ से पहले मनाए जाते थे, लेकिन जब श्रीराम ने रावण से युद्ध किया और उनकी विजय हुई।





विजयी होने के बाद वो मां का आशीर्वाद लेने के नवरात्र की प्रतीक्षा नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होने एक विशाल दुर्गा पूजा आयोजित की थी। इसके बाद से नवरात्रि का पर्व दो बार मनाते हैं।

क्या कहता है अध्यात्म

अगर एक साल में दो नवरात्र मनाने को पीछे के आधात्यामिक पहलू पर प्रकाश डालें तो जहां एक नवरात्रि चैत्र मास में गर्मी की शुरुआत में आती है तो वहीं दूसरी सर्दी के प्रारंभ में आती है। गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में आने वाली सौर-ऊर्जा से हम सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।




यह फसल पकने की अवधि होती है। मनुष्य को वर्षा, जल, और ठंड से राहत मिलती है। ऐसे जीवनोपयोगी कार्य पूरे होने के कारण दैवीय शक्तियों की आराधना करने के लिए यह समय सबसे अच्छा माना जाता है।

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रामनवमी से है संबंध

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मान्यता है कि रावण से युद्ध से पहले भगवान श्रीराम ने माता शक्ति की पूजा रखवाई थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीराम ने रावण के साथ युद्ध पर जाने से पूर्व अपनी विजय की मनोकामना मानते हुए मां के आशीर्वाद लेने के लिए विशाल पूजा का आयोजन करवाया था।

कहा जाता है कि श्रीराम देवी के आर्शीवाद के लिए इतना इतंजार नहीं करना चाहते थे और तब से ही प्रतिवर्ष दो बार नवरात्रि का आयोजन होता है। जहां शारदीय नवरात्र में यह सत्य की असत्य पर व धर्म की अधर्म पर जीत का स्वरूप माना जाता है। वहीं चैत्रीय नवरात्र में इसे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव या रामनवमी के नाम से जानते हैं।


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Source: NBT

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