गणतंत्र दिवस के बारे में ये 15 रोचक तथ्य जानकर आप हो जाएंगे हैरान

आजादी मिलते ही देश को चलाने के लिए संविधान बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया। इसी कड़ी में 29 अगस्त 1947 को भारतीय संविधान के निर्माण के लिए प्रारूप समिति की स्थापना की गई और इसके अध्यक्ष के रूप में डॉ. भीमराव अंबेडकर को जिम्मेदारी सौंपी गई।

गणतंत्र दिवस की परेड
Source

दुनिया भर के तमाम संविधानों को बारीकी से परखने के बाद डॉ. अंबेडकर ने भारतीय संविधान का मसौदा तैयार कर लिया। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद और डॉ भीम राव अम्बेडकर की अध्यक्षता में कई कानून के जानकारों ने मिलकर दिन-रात एक करके 2 साल 11 महीने 18 दिन में भारत का संविधान लिखा।

26 नवंबर 1949 को इसे भारतीय संविधान सभा के समक्ष लाया गया। इसी दिन संविधान सभा ने इसे अपना लिया। यही वजह है कि देश में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। हमारे देश के संविधान में दुसरे देशों के संविधानों से कुछ अच्छे तथ्यों को भी शामिल किया गया है जैसे स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे की अवधारणा फ्रेंच संविधान से जबकि पंचवर्षीय योजनाओं की अवधारणा अमेरिका से ली गयी।

इसे भी देखें: Happy Republic day 2019 वॉलपेपर और मैसेज हिन्दी तथा इंग्लिश में

उसके बाद 26 जनवरी 1950 को संविधान पूरे देश में लागू कर दिया गया और भारत को गणतंत्र घोषित किया गया। तब से लेकर आज तक हम इस पावन दिन की याद में हर साल 26 जनवरी को हमारे देश की शान तिरंगा फहराते हैं और देश की आजादी के लिए कुर्बान हुए शहीदों को याद करते हैं। आइए जानते हैं गणतंत्र दिवस से सम्बंधित कुछ मजेदार फैक्ट्स।


15 Important Facts About Republic Day


1) चूंकि 26 नवम्बर 1949 में संविधान लेखन का कार्य पूरा हुआ लेकिन उस दिन हीं लागू न कर के 26 जनवरी 1950 का दिन चुना गया। २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में इसलिए भी चुना गया क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था।

गणतंत्र दिवस की परेड
Source

1950 में इसी दिन 10:18 मिनट पर भारतीय संविधान लागू किया गया था और इसके 6 मिनट बाद भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने गवर्नमेंट हाऊस में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी।

2) भारतीय संविधान पूरी तरह से हाथ से लिखा गया था, जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों में है। हाथ से लिखी गई सविधान की असली कॉपी को हिलियम से भरे बक्सों में संसद भवन की लाइब्रेरी में रखा गया है।

3) गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति राजपथ पर तिरंगा फहराते है और प्रधानमंत्री अमर जवान ज्योति पर देश की आजादी में बलिदान देने वाले शहीदों को श्रृद्धाजंलि देते है।

इसे भी देखें: स्वतंत्रता दिवस के बेस्ट वॉट्सएप्प मैसेजेस कलेक्शन हिन्दी और इंग्लिश में


4) 1950 से लेकर 1954 तक गणतंत्र दिवस की परेड के लिए कोई जगह फिक्स नही थी। कभी इर्विन स्टेडियम (अब नेशनल स्टेडियम), किंग्सवे, लाल किला तो कभी रामलीला मैदान में गणतंत्र दिवस मनाया जाता था। फिर 1955 में परेड के लिए राजपथ फिक्स कर दिया गया।

5) परेड के दौरान राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी जाती है जिन्हें ’25 पाउंडर्स’ कहा जाता है। ये सलामी भारतीय सेना की 7 तोपों से दी जाती है। ये तोपें 1941 में बनाई गई थी। पहली सलामी राष्ट्रगान शुरू होते ही और फिर 52 सेकंड बाद आखिरी सलामी दी जाती है।

गणतंत्र दिवस की परेड
Source

6) राजपथ पर हर झांकी 5KM/H की बहुत धीमी रफ्तार से चलती है ताकि देखने वाले अच्छी तरह से देख सके। झांकी के आगे चलने वाला सिपाही संगीत की ताल पर मार्च करता है और झांकी का ड्राइवर छोटी सी खिड़की से उसे देखता रहता है।

इसे भी देखें: भारतीय नोटों पर गांधी जी की फोटो क्यों छपी होती है किसी अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की क्यों नहीं?

7) गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान हर साल किसी ना किसी देश के प्रधानमंत्री/राष्ट्रपति/शासक को अतिथि के रूप में बुलाया जाता है। पहले गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के प्रथम राष्ट्रपति सुकर्णों मुख्य अतिथि बने थे जबकि 1955 में राजपथ पर आयोजित पहले परेड में अतिथि के रूप में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को आमंत्रित किया गया था।

8) गणतंत्र दिवस समारोह, समय की पूरी पाबंदी के साथ मनाया जाता है। हर सेकंड का हिसाब किया जाता है मतलब, यदि समारोह 1 मिनट की देरी से शुरू हुआ है तो 1 मिनट की देरी से ही खत्म होगा।

Republic Day Parade

9) परेड के दिन परेड में भाग लेने वाले सभी दल सुबह 2 बजे ही तैयार हो जाते हैं और सुबह 3 बजे तक राजपथ पर पहुँच जाते हैं। लेकिन परेड की तैयारी पिछले साल जुलाई में ही शुरू हो जाती है जब सभी दलों को परेड में भाग लेने के लिए अधिसूचित किया जाता है।

सभी दल अपने संबंधित रेजिमेंट केन्द्रों पर नवम्बर तक परेड का अभ्यास करते हैं और दिसंबर में दिल्ली आते हैं। 26 जनवरी की परेड में औपचारिक रूप से भाग लेने से पहले तक विभिन्न दल लगभग 600 घंटे तक अभ्यास कर चुके होते हैं।

10) 26 जनवरी की परेड के लिए हर दिन अभ्यास के दौरान और फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान प्रत्येक दल 12 किमी की दूरी तय करती है जबकि परेड के दिन प्रत्येक दल 9 किमी की दूरी तय करती है। पूरे परेड के रास्ते पर जजों को बिठाया जाता है जो प्रत्येक दल पर 200 मापदंडों के आधार पर बारीकी से नजर रखते हैं, जिसके आधार पर “सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दल” को पुरस्कृत किया जाता है।


इसे भी देखें: जानिए क्यों नहीं छापती RBI ढेर सारे नोट जिससे अमीर हो जाएं सब

11) परेड का सबसे रोचक हिस्सा “फ्लाईपास्ट” होता है। इस फ्लाईपास्ट की जिम्मेवारी पश्चिमी वायुसेना कमान के पास होती है जिसमें 41 विमान भाग लेते हैं। परेड में शामिल होने वाले विभिन्न विमान वायुसेना के अलग-अलग केन्द्रों से उड़ान भरते हैं और तय समय पर राजपथ पर पहुँच जाते है।

12) गणतंत्र दिवस समारोह 3 दिन तक चलता है। 29 जनवरी को विजय चौक पर Beating Retreat Ceremony का आयोजन करके गणतंत्र दिवस का समापन किया जाता है।

13) हर साल Republic Day की परेड के अंत में Abide With Me नाम का Christian song बजाया जाता है। ये महात्मा गांधी का पसंदीदा गाना था।

14) दक्षिण अफ्रीका के पांचवें और वर्तमान राष्ट्रपति मैटामेला सिरिल रामफोसा, भारत के 70 वें गणतंत्र दिवस 2019 के मुख्य अतिथि होंगे।

15) RTI से प्राप्त जानकारी के अनुसार हर साल गणतंत्र दिवस की परेड के आयोजन में लगभग 250 करोड़ से ज्यादा रूपये खर्च हो जाते हैं।


लाइक करें हमारे Facebook Page को और इससे संबंधित विडियो देखने के लिए सब्सक्राइब करें हमारे YouTube Channel को।



इसे भी देखें:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *