ससुराल वालों से परेशान महिलाएं जरूर जान लें अपने इस असीमित कानूनी शक्तियों के बारे में


लडकियां चाहें कितना भी ओवरस्मार्ट और इरादे की पक्की क्यों न हों, लेकिन ससुराल जाने के बाद उन्ह भी एडजस्टमेंट करना पड़ता है। अगर ससुराल अच्छा मिल गया तब तो कोई दिक्कत नही होती लेकिन अगर ससुराल के लोग अच्छे नही मिले तो लड़कियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ जाता है। भले ही कोई लड़की अपने पिता के घर में अपने अधिकारों के प्रति सतर्क और सुरक्षित रहती हैं लेकिन ऐसा हमेशा ही देखा गया है कि ससुराल जाने के बाद वो मजबूरी में अपने सास और पति की गलत बातों को भी मानने लगती हैं। ऐसा नहीं है कि उसकी हिम्मत ख़त्म हो जाती है, बल्कि असल बात ये होती है कि वो अपना वैवाहिक जीवन बचाना चाहती है।

बहुत सारी लड़कियों को अपने ससुराल में घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ता है और उन्हें घर के किसी एक कमरे में कैद होकर मात्र रह जाना पड़ता है। यदि लड़की अपने ससुराल के किसी भी सदस्य के साथ थोडा-सा कड़क होकर बात कर ले तो उसकी तो जैसे शामत ही आ जाती है। भले ही ससुरालवाले खुद ही कितनी भी बड़ी गलती क्यों न कर रहे हों लेकिन यदि एक बार लड़की विरोध क्या कर दे कि उसकी तो कोई खैर ही नहीं।

Women power and Indian law

अक्सर ग्रामीण इलाकों में ऐसा देखा जाता है कि लड़की का पति खुद दिनभर गुटखा खाता रहता है और ताड़ी-शराब-भांग-गांजा वगैरह सब तरह के नशे करता है लेर्किन गर्भवती पत्नी के लिए उसके घर में 1 लीटर दूध का पैसा नहीं होता है। सारे-के-सारे मजे से घर में पड़े हुक्म चलाते रहेंगे लेकिन खुद रसोईघर तक एक बाल्टी पानी तक नहीं पहुंचा सकते। गर्भवती औरत अकेली बे-दम होकर मरती खाना पकाती रहती है लेकिन ससुरालवालों को इस बात की कोई चिंता नहीं होती। उन्हें तो बस दहेज़ और एक मुफ्त की नौकरानी चाहिए होती है जो कि उन्हें मिल ही चुकी होती है।

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इतना कुछ हो जाने के बाद यदि वो लडकी अपने तकलीफ और अधिकार की बात करे या फिर यदि इस बात की जानकारी अपने अभिभावक को देना चाहे तो उसे एक कमरे में नजरबन्द कर दिया जाता है और तरह-तरह से उलाहना भी दिया जाता है। साथ ही उसका पति उसे छोड़कर दूसरी शादी करने की धमकी तक भी दे डालता है। इसके बाद वो लडकी चाहकर भी कुछ कर नहीं पाती है और अकेले ही घुट-घुटकर मरते रहती है। यदि किसी तरीके से उसके अभिभावक को इस बात का पता चल भी जाए तो वो भी थोड़े-से प्रयासों के बाद समाज और लोक-लाज के डर से ये सोचकर चुप रहने को मजबूर हो जाता है कि इससे उसकी बहुत ही बड़ी बेइज्जती होगी कि लोग कहेंगे कि किस घर में अपनी बेटी को ब्याह दिया, पहले से सही से इस बात को चेक क्यों नहीं किया था? समाज के ऐसे ही बातों से बचने के लिए लोग अक्सर ही खून का घूँट पीकर चुप हो जाते हैं चुपचाप सब कुछ बर्दाश्त करते रहते  हैं।

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लेकिन यदि आपके साथ भी ऐसी समस्या है और आप भी ऐसी मनमानी को सहने पर मजबूर हैं तो आप बहुत ही बड़ी गलती कर रहे हैं। इस तरह से चुप रह जाने से न तो आपको कुछ हासिल होने वाला है और न ही आपकी समस्या का समाधान होने वाला है। बल्कि यदि आप साहस और धैर्य से काम लेंगे तो ऐसे ससुरालवालों के नाक में नकेल कास सकते हैं। ऐसा मैं नहीं कह रहा हूँ बल्कि हमारा क़ानून कह रहा है। आप जिस समस्या को सहने पर मजबूर हैं, उसी को क़ानून की नजर में एक बहुत ही बड़े और गंभीर अपराध की नजर से देखा जाता है। यदि आप चुप रहने के बजाये क़ानून का सहारा लेंगे तो यकीन मानिए शेर की तरह गरजने वाले लोग बहुत ही बुरी तरह से पलटी खा जायेंगे।

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जी हाँ, ऐसे समस्याओं से गुजर रहे लडकी या अभिभावक यदि कमजोर हैं तो सिर्फ-और-सिर्फ इस वजह से क्योंकि उन्हें अपनी असीमित कानूनी शक्तियों के बारे में सही से जानकारी नहीं होती है। जब भी कोई लडकी शादी करके ससुराल जाती है तब वो घर की नौकरानी नहीं बल्कि बाकि के सभी सदस्यों के तरह ही घर की मालकिन होती है और घर के संपत्ति पर उसका बराबर हक़ होता है। यदि आपको भी ऐसी ही कोई समस्या है तो आप बिलकुल भी मत डरें और चुपचाप जाकर क़ानून का दरवाजा खटखटायें। यदि आपके इस साहसी कदम को समाज को कोई भी नागरिक घृणा की नजर से देखे और आपकी निंदा करे तो आप उन्हें भी चेतावनी दे सकते हैं और उनके खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं क्या-क्या हैं आपके वो कानूनी अधिकार जिसके आधार पर आप एक्शन ले सकती हैं…..

1) आपके जरूरत को पूरा करने और हर सामग्री को पाना आपका हक़ है

जी हाँ, किसी भी स्त्री के खाने – पीने और भरण – पोषण और साथ ही साज – सज्जा के सारे सामान जैसे ज्वेलरी और शादी के समय मिले सारे उपहारों पर उसका समान हक़ होता है। ऐसे में न तो कोई भी पति अपने पत्नी को इस अधिकार से बेदखल कर सकता है और न ही बिना उसकी इजाजत के कुछ भी खर्च कर सकता है। किसी स्त्री को मिले इस अधिकार को स्त्रीधन भी कहा जाता है जो कि सभी स्त्रियों के लिए लागू होता है।

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2) रहने के लिए घर का अधिकार

यदि किसी वजह से आपको आपके ससुराल से निकाल दिया जाता है या घर में कमरा देने में आपके साथ भेदभाव किया जाता है तो आप इसपर भी क़ानून का दरवाजा खटखटा सकते हैं। सीधे तौर पर कहें तो आप पूरे घर में आजादी के साथ कहीं भी रह सकते हैं और आ-जा सकते हैं, लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि आपके इस अधिकार से किसी और के अधिकारों को कोई ठेस न पहुंचे और आप सभी के अधिकारों की समानता का ख्याल रखते हुए ही आप अपने अधिकारों की बात करें। यदि आपके पति आपको तलाक दे दे या दूसरी शादी कर ले तो भी आपके लिए उसे एक अलग घर का इंतजाम करना ही होगा।

3) तलाक के बाद संपत्ति पर होता है बराबर का हक़

यदि ससुराल वाले आपको ठुकरा दें और आपका तलाक हो जाए तो ऐसे में यदि आपके साथ भरण – पोषण या किसी भी दूसरे तरह की आर्थिकं समस्या आ जाये तो आपको इस बात का भी पूरा हक़ होता है कि आप इस सब का खामियाजा अपने पति से वसूल सकें।

4) सीआरपीसी की इस धारा 125 को भी अच्छी तरह से समझ लें

यदि आपके शादीशुदा जीवन में आपके साथ भेदभाव हो रहा हो और आपके साथ मनमानी की जा रही हो तो आप बेहिचक एक्शन ले सकते हैं। लेकिन यदि आप अपने शादीशुदा जीवन में में तलाक होने पर मिलने वाली सुविधाओं की मांग करेंगे तो ऐसा संभव नहीं है। बिना तलाक के आप सिर्फ घर के अन्य सदस्यों के तरह ही सामान रूप से जीने का हक़ पा सकते हैं और यदि आपके साथ ज्यादती हो रही है तो आप बेहिचक मुकदमा दायर करवा सकती हैं और आपको इसका सभी स्थितियों में ही पूरा अधिकार होता है।

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