जीएसटी क्या है और इसके क्या फायदे हैं?


1 जूलाई से जीएसटी लागू होने जा रहा है। इसे लेकर हर किसी के मन में एक तरह की दहशत भरी हुई है वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो आम आदमी और छोटे-मोटे व्यापारियों को उकसा रहे हैं और कह रहे हैं की जीएसटी लागू होने से उन्हे बहुत नुकसान होगा। समस्या ये है कि हमारे देश का आदमी खुद से सच्चाई जानने के बजाय दूसरों के बहकावे में आकर उसकी बात को सच मान लेता है।

इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए हम आपको आज जीएसटी और उसके फायदे और नुकसान के बारे में बताने जा रहे हैं। जीएसटी लागू होने से किसे फायदा होगा और किसे नुकसान उठाना पड़ेगा। इस बारे में हम विस्तार से चर्चा करेंगे।

जीएसटी क्या है?

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जीएसटी यानि गुड्स एंड सर्विस टैक्स एक प्रकार का टैक्स है जो हर तरह की वस्तुओं और सामान को खरीदने पर हमें सरकार को देना होगा। अभी वर्तमान में हम किसी भी सामान को खरीदते वक्त उस पर वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे टैक्स देते हैं लेकिन जीएसटी लागू हो जाने के बाद हमें इन सबके बदले में सिर्फ एक हीं टैक्स देना होगा।


जीएसटी क्यूँ जरूरी है?

अभी आम आदमी कई तरह के टैक्स के बोझ से दबा हुआ है। कई बार तो लोगों को लगता है कि वो पैसे सिर्फ सरकार को टैक्स देने के लिए कमाते हैं। जीएसटी लागू होने पूरे देश में सामान की कीमतें लगभग एक समान हो जाएंगी। अभी वर्तमान टैक्स प्रणाली के कारण पूरे देश में एक हीं सामान अलग-अलग कीमत पर मिलता है जैसे मान लीजिए दिल्ली में अगर आपने 50,000 रूपये में बाइक खरीदा और वही बाइक आप बिहार में जाकर खरीदेंगे तो आपको 2000-5000 रूपये तक महँगा पड़ेगा।

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आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यूँ होता है तो इसका जवाब है कि बिहार में जो एजेंसी वो बाइक मँगवाती है तो उस बाइक को लाने वाला वाहन कई राज्यों से गुजरते हुए आता है जिस कारण उसे एंट्री टैक्स, ट्रांसपोर्ट टैक्स देना पड़ता है उसके अलावा जिस राज्य में वो बाइक बिकेगी उसका अलग टैक्स सिस्टम होता है। उस सिस्टम के तहत टैक्स भी चुकाना होता है। तो इन सबको मिलाकर कीमतों में फर्क आ जाता है। लेकिन जीएसटी के लागू होने के बाद कीमतें या तो एक समान होंगी या फिर उनमे मामूली फर्क आएगा।



जीएसटी कैसे काम करेगा?

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केंद्र सरकार ने जीएसटी को तीन भागों में बाँटा है-


1) केंद्रीय जीएसटी

2) राज्य जीएसटी


3) इंटीग्रेटेड जीएसटी

इसमे से केंद्रीय और इंटीग्रेटेड जीएसटी केंद्र सरकार लागू करेगी जबकि राज्य जीएसटी लागू करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी।

जीएसटी के फायदे

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1) जीएसटी लागू होने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे सारे अप्रत्यक्ष कर जैसे एक्साइज, सर्विस टैक्स इत्यादि समाप्त हो जाएंगे।

2) सभी तरह के अप्रत्यक्ष कर को मिला कर हमें 30-50% तक टैक्स देना पड़ जाता है लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद हमे 18% से अधिकतम 28% तक टैक्स देना होगा जिससे सामान के सस्ता मिलने की संभावना बढ जाएगी।

3) जीएसटी के आने से व्यापारियों को भी फायदा होगा। उन्हे बाहर से सामान खरीदकर अपने राज्य में ले जाने में अलग टैक्स सिस्टम के कारण होने वाली परेशानियाँ अब नही होगी।

4) अब किसी भी कंपनी को कच्चा माल मंगवाते वक्त अलग-अलग टैक्स नही देना होगा जिससे किसी प्रोडक्ट को बनाने में उनकी लागत घटेगी। इससे सामान सस्ता होगा और मंहगाई घटेगी।

5) पहले एक हीं सामान पर केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही टैक्स लेते थे लेकिन जीएसटी के आने के बाद केंद्र और राज्य में से किसी एक को हीं टैक्स देना होगा। इससे भी सामान सस्ते होंगे और लोगों को अतिरिक्त टैक्स के बोझ से राहत मिलेगी।


जीएसटी के संभावित नुकसान

हालांकि अभी तक जीएसटी लागू नही हुआ है इसलिए इसके नुकसान के बारे में अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन जीएसटी के मुद्दे पर पहले राज्य सरकारों को डर था कि ये टैक्स लागू हो जाने के बाद उनके रेवेन्यू में कमी आ जाएगी। जिस कारण पिछले कई सालों से इस पर आम सहमति नही बन पा रही थी। लेकिन केन्द्र में मोदी सरकार के आने के बाद इस पर आम सहमति बनाने की कोशिश शुरू हुई।

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केन्द्र ने राज्यों को जो प्रस्ताव दिया उसके अंतर्गत पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और रसोई गैस को जीएसटी से बाहर रखा गया है। गौरतलब है कि कई राज्यों की आधी कमाई सिर्फ इन्ही चीजों से चलती है इसलिए केंद्र ने सभी राज्यों को पेट्रोलियम पदार्थों पर अगले कुछ सालों तक अपना-अपना टैक्स लगाने की छूट दे दी है। इसके बाद राज्यों को कमाई में जो भी नुकसान होगा उसकी भरपाई अगले पांच साल तक केंद्र करेगा। इसके अलावा अल्कोहल को भी जीएसटी से बाहर रखा गया है।

इन पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी से बाहर रखने के कारण अभी भी लोगों को अलग-अलग राज्यों अलग-अलग कीमतें देनी होंगी। इसका मतलब कि अभी भी आपको अगले कुछ सालों तक रसोई गैस या पेट्रोल-डीजल सस्ता मिलने की उम्मीद नही है।

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