नही रहे मशहूर अभिनेता शशि कपूर, 79 साल की उम्र में हुआ निधन

हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता शशि कपूर का सोमवार 4 दिसंबर, 2017 को को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 79 साल के थे। उन्होंने कोकिलाबेन अस्पताल में अंतिम सांस ली। अपने समय में इंडस्ट्री के सबसे व्यस्ततम अभिनेताओं में शुमार शशि कपूर हिंदी सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले पृथ्वीराज कपूर के घर 18 मार्च, 1938 को जन्मे थे।

शशि कपूर
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शशि पृथ्वीराज के चार बच्चों में सबसे छोटे थे। उनकी मां का नाम रामशरणी कपूर था। आकर्षक व्यक्तित्व वाले शशि कपूर के बचपन का नाम बलबीर राज कपूर था। बचपन से ही एक्टिंग के शौकीन शशि स्कूल में नाटकों में हिस्सा लेना चाहते थे। उनकी यह इच्छा वहां तो कभी पूरी नहीं हुई, लेकिन उन्हें यह मौका अपने पिता के ‘पृथ्वी थियेटर्स’ में मिला।

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शशि कपूर ने पृथ्वी थिएटर के नाटक ‘शंकुतला’ से अपने करियर की शुरू की थी। पृथ्वी थिएटर में हीं काम करने के दौरान वह भारत यात्रा पर आए गोदफ्रे कैंडल के थिएटर ग्रुप ‘शेक्सपियेराना’ में शामिल हो गए। थियेटर ग्रुप के साथ काम करते हुए उन्होंने दुनिया भर की यात्राएं कीं और गोदफ्रे की बेटी जेनिफर के साथ कई नाटकों में काम किया। इसी बीच उनका और जेनिफर का प्यार परवान चढ़ा और 20 साल की उम्र में ही उन्होंने खुद से तीन साल बड़ी जेनिफर से शादी कर ली। कपूर खानदान में इस तरह की यह पहली शादी थी।


राज कपूर की पहली फिल्म ‘आग’ और तीसरी फिल्म ‘आवारा’ में शशि ने अपने बड़े भाई राज कपूर के बचपन की भूमिकाएं निभाई थीं। यश चोपड़ा ने फिल्म ‘धर्मपुत्र’ के जरिए शशि को इंडस्ट्री में एंट्री कराई थी। शशि कपूर ने अपने करियर में 160 (148 हिन्दी और 12 अंग्रेजी से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। ‘धर्मपुत्र’ के बाद शशि ने ‘चारदीवारी’ और ‘प्रेमपत्र’ जैसी असफल फिल्मों में काम किया था।

शशि कपूर
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इसके बाद उनकी ‘मेहंदी लगी मेरे हाथ’, ‘मोहब्बत इसको कहते हैं’, ‘नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे’, ‘जुआरी’, ‘कन्यादान’, ‘हसीना मान जाएगी’ जैसी फ़िल्में आई, लेकिन सारी नाकामयाब रही। ‘जब-जब फूल खिले’ फिल्म के जरिए शशि की कामयाबी का सफर शुरू हुआ। यह फिल्म गोल्डन जुबली साबित हुई थी। फिल्म दीवार में उनका डायलॉग “मेरे पास माँ है”आज भी लोगों की जुबान पर है।

60 और 70 के दशक में उन्होंने जब-जब फूल खिले, कन्यादान, शर्मीली, आ गले लग जा, रोटी कपड़ा और मकान, चोर मचाए शोर, दीवार कभी-कभी और फकीरा जैसी कई हिट फिल्में दी।


शशि ऐसे ऐक्टर थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश और अमेरिकी फिल्मों में काम किया था। इनमें ‘द हाउसहोल्डर’, ‘शेक्सपियरवाला’, ‘बॉम्बे टॉकीज’ तथा ‘हिट एंड डस्ट’ जैसी फिल्में शामिल हैं। बॉलीवुड से वह लगभग संन्यास ले चुके थे। वर्ष 1998 में आई फिल्म ‘जिन्ना’ उनके सिने करियर की आखिरी फिल्म थी


अपनी फिल्म ‘जुनून’ के लिए उन्हें बतौर निर्माता राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, ‘न्यू डेल्ही टाइम्स’ में एक्टिंग के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साल 2011 में उनको भारत सरकार ने पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था। साल 2015 में उनको 2014 के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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