पेप्सी और कोका कोला में है HIV एड्स का संक्रमित ब्लड, जानिये क्या है पूरी सच्चाई ?


लोगों को हिलाकर रख देने वाला एक बहुत ही धमाकेदार न्यूज़ आजकल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें ये कहा जा रहा है कि अगले कुछ हफ़्तों तक कोका कोला या पेप्सी न पियें क्योंकि किसी वर्कर ने इसमें HIV से संक्रमित अपना ब्लड मिला दिया है। और फिर जैसा कि हर न्यूज़ में फॉरवर्ड करने को कहा जाता है इसमें भी कहा गया है कि कृपया इसे अपने सभी फ्रेंड्स और रिलेटिव्स को फॉरवर्ड करें जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों की इसकी जानकारी हो।

तो अब आपलोगों के ये तो अंदाजा लग ही गया होगा कि किस तरह से लोग फेसबुक और व्हाट्सएप्प जैसे सोशल साइट्स का गलत इस्तेमाल करते हैं और लोगों को भ्रमित करने का काम करते हैं। और इससे भी बड़ी बात यह कि दूसरे लोग भी बिना कुछ सोचे-समझे ऐसे फेक न्यूज़ को अपने दोस्तों के साथ तुरंत ही शेयर भी कर देते हैं जिससे कि ये तुरंत ही वायरल हो जाता है।

Pepsi hiv blood found news

 

ऐसे न्यूज़ को वायरल करने वाले लोग शायद ये नहीं जानते कि ऐसे फेक न्यूज़ को वायरल करना एक बहुत ही बड़ा अपराध है और इसमें शामिल हरेक लोगों को सजा हो सकती है। यदि इन ब्रांड्स की कंपनी के मालिक चाह लेंगे तो पलभर में ही इसमें शामिल लोगों को जेल की हवा पिला सकते हैं। इसलिए सभी लोगों को चाहिए कि इन न्यूज़ को नजरअंदाज कर दिया करें और इसे किसी के साथ भी शेयर न करें। यदि ये न्यूज़ सही होंगे तो यकीन मानिए कि आपके फॉरवर्ड करने से पहले ही इसकी जानकारी पूरी दुनिया को हो जाएगी और ऐसे प्रोडक्ट्स पर तुरंत ही बैन लगा दिया जायेगा। क़ानून ऐसे गंभीर मामले में कभी चुप नहीं रह सकता।

Coca cola logo viral news


यदि इस न्यूज़ की बात करें तो ये भी बाकि के ही सारे फेक न्यूज़ के तरह ही बिल्कुल ही फेक है और इसका कोई आधार ही नहीं है।यदि आप एक बार इस न्यूज़ को गंभीरता से पढ़ लेंगे तो आपको इसमें एक नहीं बल्कि सैकड़ों ऐसे पॉइंट्स मिल जायेंगे जो कि इसे फेक और बिल्कुल ही गलत साबित करते हैं। तो चलिए, जानते हैं ऐसे ही कुछ पॉइंट्स के बारे में विस्तार से…..

1) ये न्यूज़ 2011 में भी वायरल हो चुका है.

जी हाँ, ये न्यूज़ 2011 में भी वायरल हो चूका है लेकिन चूंकि उस समय इन्टरनेट से बहुत ही कम लोग जुड़े हुए थे इसलिए ये बात ज्यादा लोगों को पता नहीं चल पायी थीं। अब ऐसे में आप ही सोचिये कि यदि ये न्यूज़ सही होता तो भला तब से लेकर अब तक ये दोनों कम्पनियां बंद नहीं हो चुकी होती।

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2) कोका कोला और पेप्सी दोनों ही ब्रांड अलग-अलग कंपनियों के हैं।

यदि आप उस न्यूज़ को सही से पढेंगे तो आप साफ़ तौर से देख सकते हैं कि उसमें कोका कोला और पेप्सी दोनों दोनों में ही ब्लड मिलने की बात कही गयी है। लेकिन जैसा कि आप जानते ही हैं कि ये दोनों अलग-अलग कम्पनियाँ हैं तो ऐसे में भला कोई भी एक आदमी दोनों ही प्रोडक्ट्स में एक ही साथ कुछ भी कैसे मिला सकता है?



3) HIV से संक्रमित मरीज को काम कैसे मिल गया?

HIV जैसे रोग से संक्रमित मरीज खुद ही अपने बीमारी से जूझते रहते हैं। उन्हें इतनी हिम्मत नहीं होती कि वो कहीं पर काम कर सकें। लेकिन यदि मान भी लेते हैं कि वो किसी तरह से काम कर भी सकते हैं तो भला ऐसे खतरनाक बीमारी से संक्रमित व्यक्ति को किसी कंपनी ने आखिर काम कैसे दे दिया, और वो भी फ़ूड या पेय जैसे गंभीरता वाले कामों में।

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4) ये न्यूज़ फैलाया किसने?

क्या ये न्यूज़ इन कंपनियों के मालिक ने फैलाया है? बिलकुल नहीं, यदि ये न्यूज़ थोड़ी-सी भी सही होती तो या तो अब तक ये कम्पनियां बंद हो चुकी होतीं या फिर सभी दुकानों से इनके स्टॉक को जब्त करके या तो उसे जांच के लिए भेजा जाता या फिर नष्ट कर दिया जाता। यदि ऐसी बातें उस कंपनी के मालिक को पता नहीं है तो भला दूसरा लोग इसे कैसे जानता है?

5) इस न्यूज़ को वायरल करने वाले को क्या HIV से संक्रमित मजदूर ने न्योता दिया था लाइव प्रदर्शन देखने का?

क्या एड्स से पीड़ित व्यक्ति ने जान-बूझकर इसमें ब्लड मिलाया था? यदि ऐसी बात है तो उन सभी वर्करों पर मुकदमा चल चूका होता जिन्होंने सच जानते हुए भी इसे छुपाया और मार्किट में आराम से उतरवा दिया। जिसने इस न्यूज़ को वायरल किया है क्या उसने अपने आँख से खून मिलते देखा था? यदि हाँ, तो उसने उसी समय एक्शन क्यों नहीं लिया जो इसके मार्केट में उतरने के इन्तजार करता रहा और जब ये प्रोडक्ट बाजार में उतर गया तब सोशल साइट्स पर वायरल किया? ऐसे में तो उसपर भी मुकदमा चल चुका होता।

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6) क्या कुछ हफ़्तों तक पेप्सी या कोका कोला न पीने से उसमें से एड्स का संक्रमण ख़त्म हो जायेगा?

वायरल हुए न्यूज़ में सीधे ही कहा गया है कि इसे कुछ हफ़्तों तक न पियें। तो क्या कुछ हफ़्तों के बाद इसे पिया जा सकता है? क्या तब तक इसका संक्रमण ख़त्म हो जायेगा? बिलकुल नहीं, यदि ये सच है तो अब तक ये प्रोडक्ट मार्केट से कानूनी रूप से ही बाहर हो चूका होता। लोगों के एक्शन लेने से पहले ही क़ानून एक्शन ले चुका होता। क़ानून इतना मूर्ख नहीं कि वो पहले कुछ लोगों के मरने का इन्तजार करे और तब इसपर एक्शन ले।

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7) वायरल हुए फोटो में क्या लोग सच में पेप्सी और कोका कोला को फेंक रहे  हैं?

बिल्कुल नहीं, यदि ये फोटो फेक नहीं है तो इसका एक ही मतलब है कि वे लोग बोतल में भरे पानी को फेंक रहे होंगे और ऐसे में ही किसी न उसे शूट कर लिया। यदि आप गौर से फोटो को देखेंगे तो आपको पता चल जायेगा कि उसमें हरा रंग के बोतल से भी पानी फेंका जा रहा है जबकि पेप्सी और कोका कोला दोनों में से किसी का भी बोतल हरा नहीं होता है। साथ ही बोतल से द्रव नीचे गिर रहा है वो पानी के रंग का यानि कि उजला है जबकि यदि वो सच में होता तो गिरने वाले द्रव का रंग काला होता क्योंकि कोका कोला और पेप्सी दोनों का ही रंग काला होता है।

8) अब तक इन कंपनियों पर एक्शन क्यों नहीं लिया गया?

यदि ये न्यूज़ सही होता तो अब तक इन कंपनियों का दिवाला निकल चुका होता। सबसे पहले तो एड्स से संक्रमित मरीज को काम पर रखने के लिए और फिर ऐसे गंभीर बातों की जानकारी होते हुए भी उस प्रोडक्ट को मार्केट में उतार देने के जुर्म में क़ानून इन्हें कभी माफ़ नहीं कर सकता। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे कि स्पष्ट है कि ये न्यूज़ बिल्कुल ही गलत है और ये अफवाह से बढ़कर कुछ भी नहीं है।

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