क्या आप सिकंदर के बारे में ये बात जानते हैं?

सिकंदर के बारे में कौन नही जानता। यूनान के मेसिडोनिया का राजा सिकंदर पूरी दुनिया जीतना चाहता था इसलिए वह विश्व विजय के अभियान पर निकल पड़ा। ऐसा कहा जाता है कि उसका असली मकसद विश्व विजेता बनना नही बल्कि अमृत जल की तलाश करना था जिसे पीकर लोग अमर हो जाते हैं। अपने इस मकसद को पूरा करने के लिए उसने कई देशों पर चढाई की और उन्हे जीतते हुए भारत तक आया।

काफी दिनों तक देश दुनिया में भटकने के पश्चात आखिरकार सिकंदर ने वह जगह पा ही ली, जहां उसे अमृत की प्राप्ति होती। वह अमृत जल का झरना एक गुफा में था। सिकंदर उस गुफा में प्रवेश कर गया और अपने सामने उस अमृत के झरने को देखकर वह आनंदित हो गया।

जन्म-जन्म की आकांक्षा पूरी होने का क्षण आ गया। उसके सामने ही अमृत जल कल-कल करके बह रहा था। वह अंजलि में अमृत को लेकर पीने के लिए झुका ही था कि तभी एक कौआ जो उस गुफा के भीतर बैठा था, जोर से बोला, ‘ठहर, रुक जा, यह भूल मत करना।’ सिकंदर ने कौवे की तरफ देखा। बड़ी दुर्गति की अवस्था में था वह कौआ। पंख झड़ गए थे, पंजे गिर गए थे, अंधा भी हो गया था, बस कंकाल मात्र था।

Story of Amar Jal and Sikandar

सिकंदर ने कहा, ‘तू रोकने वाला कौन?’ कौवे ने जवाब दिया, ‘मेरी कहानी सुन ले। मैं अमृत की तलाश में था और यह गुफा मुझे भी मिल गई थी। मैंने यह अमृत पी लिया। अब मैं मर नहीं सकता, पर मैं अब मरना चाहता हूं। देख मेरी हालत। अंधा हो गया हूं , पंख झड़ गए हैं, उड़ नहीं सकता। पैर गल गए हैं। एक बार मेरी ओर देख ले फिर मर्जी हो तो अमृत पी ले।

देख अब मैं चिल्ला रहा हूं, चीख रहा हूं कि कोई मुझे मार डाले, लेकिन मुझे मारा भी नहीं जा सकता। अब प्रार्थना कर रहा हूं परमात्मा से कि प्रभु मुझे मार डालो। एक ही आकांक्षा है कि किसी तरह मर जाऊं। इसलिए सोच ले एक दफा, फिर जो मर्जी हो सो करना।’ कहते हैं कि सिकंदर सोचता रहा। फिर चुपचाप गुफा से बाहर वापस लौट आया, बगैर अमृत पिए। सिकदंर समझ चुका था कि जीवन का आनंद उस समय तक ही रहता है, जब तक हम उस आनंद को भोगने की स्थिति में होते हैं।

इसलिए जब तक जीवन है उसका भरपूर आनंद लीजिए। अमरता एक अभिशाप की तरह है। अमर व्यक्ति कुछ समय तक तो खुश रहता है लेकिन बाद में उसकी हालत उस कौए जैसी हो जाती है।


(ठाकुर संजय सिंह जी के फेसबुक वॉल से)



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