माँग में सिंदूर लगाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण जानकर आप हैरान हो जाएंगे

आजकल सिंदूर को लेकर कुछ बुद्धिजीवी वर्ग के लोग आपत्ति जता रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि सिंदूर लगाना पिछड़ेपन का प्रतीक है। हालांकि वो लोग ऐसा किस कारणों से मानते हैं ये बताने को वो तैयार नही हैं या फिर उन्हे मालूम नही है। हम भी इस बहस में नही पड़ना चाहेंगे लेकिन उनके इस सवाल को सुनकर आपके मन में भी ये बात जरूर आई होगी कि आखिर स्त्रियां अपनी मांग में सिंदूर क्यों लगाती हैं?

माँग में सिंदूर
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हिन्दू धर्म में सिंदूर को सुहागन स्त्री की निशानी मानी जाती है। इसलिए शादी के बाद हर हिन्दू स्त्री अपनी माँग में सिंदूर जरूर लगाती है। हालांकि नए जमाने के साथ चलते हुए महिलाएं अब सिन्दुर की जगह पर लिक्विड या पेंसिल सिंदूर लगाना ज्यादा पसंद करती हैं। ये एक तरह से केमिकल वाला सिंदूर होता है जो धार्मिक हीं नही बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी हानिकारक होता है।

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आपको जानकर हैरानी होगी कि स्त्रियों के सिंदूर लगाने के पीछे एक वैज्ञानिक कारण हैं। सनातन धर्म में मौजूद लगभग सभी परंपराओं के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण जरूर है। हमारे पूर्वजों और ॠषि-मुनियों ने काफी रिसर्च के बाद सिंदूर लगाने की परंपरा शुरू की। इस परंपरा के तहत स्त्रियों के मांग में पुरूषों के ललाट पर तिलक या टीका लगाना अनिवार्य कर दिया। आइये जानते हैं सिंदूर लगाने के पीछे के वैज्ञानिक कारण को।

महिलाएं माँग में सिंदूर क्यों लगाती हैं?

सिंदूर हमेशा मस्तिष्क के मध्य भाग में लगाया जाता है। हमारे शरीर जो कि ऊर्जा का हीं एक रूप है, उसमें सात चक्र होते हैं। इन सात चक्रों में से दो चक्रों आज्ञा चक्र और सहस्रार चक्र का मस्तिष्क के मध्य भाग पर मिलन होता है। इन दोनों चक्रों के बीच के भाग पर एक बहुत महत्वपूर्ण ग्रंथि होती है जिसे ‘ब्रह्मरंध्र’ कहा जाता है। इसी ब्रह्मरंध्र पर महिलाएं सिंदूर लगाती हैं।

माँग में सिंदूर
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काफी शोध के बाद वैज्ञानिकों ने भी ये माना है कि जब लड़कियां शादी कर के अपनी ससुराल जाती हैं तो वहां उन पर अचानक हीं बहुत ज्यादा जिम्मेदारियां और दायित्व आ जाते हैं जिनका सीधा प्रभाव उनके मस्तिष्क पर पड़ता है। जिसकी वजह से उन्हे विवाह के बाद सिर दर्द और अनिद्रा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ जाता है।

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दरअसल सिंदूर में पारा नामक धातु की अधिकता होती है। यह धातु ब्रह्मरंध्र ग्रंथि के लिए बहुत हीं प्रभावशाली मानी जाती है। यह धातु महिलाओं के मस्तिष्क के तनाव और चिंता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि सिंदूर के लगातार प्रयोग के कारण महिलाओं का मस्तिष्क हमेशा चैतन्य अवस्था में रहता है।

सिंदूर लगाने से महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरूषों के तेज में भी वृद्धि होती है। इसका उदाहरण देखना हो तो आप किसी तिलक लगाए हुए पुरूष और एक बिना तिलक लगाए हुए पुरूष को देखिए। आपको स्पष्ट रूप से फर्क दिखेगा।

हालांकि अब मिलावट का दौर चल रहा है। ऐसे में शुद्ध और असली धातुओं का मिलना लगभग नामुमकिन है लेकिन ऐसा भी नही है कि बिल्कुल मिलेगा हीं नही। इसलिए किसी भी परंपरा को सिर्फ ढकोसला, अंधविश्वास और पिछड़ापन कहकर उसका मजाक उड़ाने से पहले उसके पीछे छुपे वैज्ञानिक कारण को जरूर जान लेना चाहिए।

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