ट्रेन से यात्रा के दौरान रेलवे देता है आपको कई महत्वपूर्ण अधिकार, जानें अपने अधिकारों के बारे में

अक्सर ट्रेन में सफ़र करते वक्त यात्रियों को कोई न कोई समस्या का सामना करना पड़ जाता है। यात्री आए दिन किसी न किसी समस्या से जूझते रहते हैं। अपने अधिकारों के बारे में उचित जानकारी नही होने के कारण हम उस समस्या के समाधान के लिए रेलवे पर दबाव नही बना पाते हैं। जबकि भारतीय रेलवे की ये ज़िम्मेदारी है कि वो हर यात्री को सुरक्षित यात्रा कराए और उनकी सुविधाओं का ख़्याल रखे।

यात्रियों की सुविधाओं और उनकी ट्रेन यात्रा में हुए नुकसान के हर्जाने के लिए रेलवे अधिनियम-1989 के तहत यात्रियों को कई सारे अधिकार दिए गए हैं। आइये जानते हैं उन अधिकारों के बारे में।


जानें रेलयात्री के तौर पर अपने अधिकार

रेलवे अधिनियम-1989
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1) रेलवे अधिनियम के मुताबिक, रेलवे को हर स्टेशन और ट्रेन में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था करनी जरूरी है। यात्री को किसी भी तरह की स्वास्थ्य परेशानी होने पर वह टीटीई या किसी रेलवे स्टाफ़ की मदद ले सकते हैं। अगर यात्रा के दौरान यात्री की तबियत ज़्यादा बिगड़ जाती है, तो रेलवे को अगले स्टेशन पर डॉक्टर और एम्बुलेंस की व्यवस्था करवानी होगी।

2) अगर आपके पास कन्फर्म टिकट है और किसी कारणवश आप यात्रा नही कर पा रहे हैं तो आपके कन्फ़र्म टिकट पर आपके परिवार के सदस्य (ब्लड रिलेटिव) भी यात्रा कर सकते हैं, बशर्ते 24 घंटे पहले आपने मुख्य आरक्षित अधिकारी से टिकट ट्रांसफ़र का रिक्वेस्ट किया हो।

3) रेलवे वृद्ध महिला और पुरूषों के लिए स्पेशल रियायती टिकट भी देता है। 60 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को टिकट बुक कराने पर 40% और 58 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को 50% की छूट दी जाती है। हालांकि इसके लिए यात्री को ट्रेन में वैध प्रमाण पत्र दिखाना होता है जिसमे उस व्यक्ति की आयु अंकित हो।

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4) रेलवे ने अब यात्रियों के लिए बीमा योजना भी शुरू किया है। अब आप ऑनलाइन टिकट बुक करने पर मात्र 92 पैसे ख़र्च कर के 10 लाख रुपये तक की यात्रा बीमा सुनिश्चित कर सकते हैं। यात्रा के दौरान किसी तरह की दुर्घटना होने पर रेलवे यात्री या उसके परिजनों को बीमा की रकम देगा।

5) हर पैसेंजर ट्रेन में महिलाओं के लिए एक बोगी आरक्षित होती है, जिसमें पुरुषों का यात्रा करना दंडनीय है। सिर्फ़ 12 साल से कम उम्र के बच्चे अपने रिश्तेदारों के साथ यात्रा कर सकते हैं।

6) अगर आप एसी कोच में यात्रा कर रहे हैं और एसी ख़राब है, तो ऐसे में आप टिकट की राशि पर रिफ़ंड का क्लेम कर सकते हैं।

7) इसके अलावा आपके किसी भी शिकायत की सुनवाई, स्टेशन पर पीने के पानी और शौचालय, विश्राम गृह, रिज़र्वेशन चार्ट, टिकट पर यात्रा का वर्णन जैसी सुविधाएं पाना आपका अधिकार है और रेलवे इससे वंचित नहीं कर सकता है।

8) अगर आपने ई-टिकट बुक किया हो तो आप 24 घंटे पहले बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं। लेकिन एक बार ऐसा करने के बाद चाहकर भी आप दोबारा बोर्डिंग स्टेशन नहीं बदल पाएंगे।


9) ट्रेन अगर 3 घंटे से ज्यादा लेट है तो ऐसी स्थिति में आप अपना टिकट कैंसिल करा सकते हैं और रेलवे को पूरा रिफंड करना होगा।

10) अगर किसी कारणवश ट्रेन को डायवर्टेड रूट पर चलाया जाता है और उस रूट में आपका स्टेशन नही आता है तो ऐसी स्थिति में भी आप रिफंड क्लेम कर सकते हैं।

अगर आपको संबंधित स्टेशन पर इन सुविधाओं में कमी दिखाई देती है या आपकी शिकायत का निपटारा सही ढंग से नही होता है तो आप रेलवे स्टेशन प्रमुख से शिकायत कर सकते हैं। अगर वहां भी मामले का निपटारा नहीं होता है तब आप ज़ोनल अधिकारी या रेलवे मंत्रालय से भी शिकायत कर सकते हैं। हाल हीं में कई यात्रियों ने ट्विटर के जरिए भारतीय रेलवे और रेलमंत्री से भी मदद मांगी है जिस पर तुरंत एक्शन लेते हुए रेलवे ने कई यात्रियों को मदद भी पहुंचाया है।

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