बिहार में महागठबंधन का टूटना पहले से हीं तय था, जानिए क्यूँ

बिहार में बुधवार शाम से जारी राजनीतिक उठापठक आज सुबह नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री के शपथ लेते हीं शांत हो गई। नीतीश कुमार ने छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद का शपथ लिया उनके साथ सुशील मोदी ने भी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बीजेपी के सहयोग से नीतीश कुमार के फिर से मुख्यमंत्री बनने पर लालू यादव और राहुल गांधी ने उन पर धोखा देने का आरोप लगाया।

नीतीश-लालू का बिहार में महागठबंधन शुरू से ही एक बेमेल शादी की तरह था और नीतीश कुमार को वक्त रहते ये बात समझ में आ भी गई। और आज उन्होंने अगर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया तो उसकी कुछ वजह साफ हैं।

बिहार में महागठबंधन
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1) लालू यादव के साथ काम करने के दौरान नीतीश को शुरू में ही ये समझ में आ गया था कि ये रिश्ता उतना सहज नहीं रहेगा जितना उनका बीजेपी के साथ था। लालू अपने बेटों और विधायकों के ज़रिए जिस तरह समानान्तर सत्ता चला रहे थे उससे बतौर मुख्यमंत्री वो लगातार खुद को ही कमज़ोर महसूस कर रहे थे।

2) बीजेपी ने उनकी इस असहजता को समझा और अर्से पहले ही उन्हें समर्थन का भरोसा दे दिया था। जिसके बाद नीतीश को गठबंधन से खुद को अलग करने की नैतिक और जायज़ वजह चाहिए थी। ऐसी वजह जो उनकी छवि के मुताबित हो। ये वजह तेजस्वी और तेज प्रताप और पूरे लालू परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोपों के रूप में मिल भी गई।

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3) पिछली बार जब मोदी के नाम पर नीतीश ने खुद को अलग किया था तो उसके पीछे उनकी प्रधानमंत्री बनने की लालसा और अल्पसंख्यक वोट की चिंता भी थी, मगर इन 3 सालों में ख़ासकर यूपी चुनावों के बाद उन्हें समझ आ गया कि मौजूदा हालात में मोदी का अगले चुनावों में हारना संभव नहीं।

बिहार में महागठबंधन
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उन्हे ये बात समझ में आ गई थी कि कोई ऐसा महागठबंधन बनता दिख नहीं रहा जो किसी तरह से भी राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी को चुनौती दे पाए।

अगर महागठबंधन बन भी गया तो ऐसी कोई आम सहमति नहीं बन सकती कि उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार बना दिया जाए। क्योंकि ममता, अखिलेश, राहुल, केजरीवाल सहित दावेदार कई हैं। ऐसे में जब पीएम अभी बन नहीं सकते और रहना मुख्यमंत्री ही है, तो कम से कम उस पार्टी के साथ रहो जिसके साथ वो ज़्यादा सहज हैं।

वोट बैंक के लिहाज़ से भी बीजेपी विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी थी। लिहाज़ा उसके साथ अगला विधानसभा चुनाव जीतना भी कोई चुनौती भी नहीं होगा। यानि पीएम बन नहीं सकते तो कम से कम अगले कुछ सालों के लिए अपना मुख्यमंत्री बनना तो सुनिश्चित करो।

आज का इस्तीफा अपने उसी भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक दीर्घकालीन कदम है। बस इस कदम को उठाने के लिए उन्हें एक जायज़ वजह चाहिए थी। एक बहाना चाहिए। वो बहाना जो लालू यादव के घोटालों के रूप में पहले से मौजूद था और उन घोटालों को सामने लाने का काम सीबीआई ने कर दिया।

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