जानिए क्‍या सरकार के पास है CBI डायरेक्टर को हटाने का पावर?

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भारत में अपराध और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की सर्वोच्च संस्था केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा के प्रधानमंत्री कार्यालय के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद यह विवाद मौजूदा सरकार के लिए अब नाक का सवाल बन गया लगता है।

सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच बीते कुछ समय से रिश्वत को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा था।

सीबीआई के डायरेक्टर

आलोक वर्मा ने सीबीआई डायरेक्टर की हैसियत से राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ रिश्वत लेने के एक कथित मामले में एफ़आईआर करके जांच करना शुरू किया था। सीबीआई ने इस सिलसिले में ही छापा मारा और अपने ही स्टाफ़ डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ़्तार किया।

लेकिन राकेश अस्थाना अपने ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर में गिरफ़्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट चले गए। इसके बाद मंगलवार की रात, केंद्र सरकार ने इस मामले में दखल देते हुए सीबीआई के नंबर-1 वर्मा और नंबर-2 अधिकारी अस्थाना दोनों को छुट्टी पर भेज दिया। अस्थाना के ख़िलाफ़ जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी एके बस्सी को भी पोर्ट ब्लेयर भेज दिया गया।

इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या सरकार सीबीआई के प्रमुख को इस तरह से छुट्टी पर भेज सकती भी है या नहीं क्योंकि उसका तय कार्यकाल दो साल का होता है और अगर उसे हटाना है तो उसके लिए भी एक तय प्रक्रिया है जिसका पालन हुआ या नहीं।

सबसे पहले जानते हैं कि

सीबीआई के डायरेक्टर की नियुक्ति कौन करता है?

सीबीआई के डायरेक्टर की नियुक्ति सेन्ट्रल विजिलेंस कमीशन करती है। इस कमिटी में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमन्त्री और विपक्ष के मुख्य नेता शामिल होते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार अपनी मर्जी से सीबीआई के डायरेक्टर का ट्रांसफर या निलंबन आदेश दे सकती है या छुट्टी पर भेजने का अधिकार रखती है?

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यहां हम बता दें की सरकार अपनी मर्जी से सीबीआई के डायरेक्टर को निलंबित या ट्रांसफर नहीं कर सकती है लेकिन विशेष परिस्थितयों में छुट्टी पर भेजने का अधिकार रखती है। सीबीआई डायरेक्टर के ट्रांसफर या उन्हें पद से हटाने के लिए सरकार को पूरे मामले की जानकारी सेलेक्शन पैनल को भेजनी होती है। वहीं डायरेक्टर के तबादले की प्रक्रिया में सेलेक्शन कमेटी सीवीसी, होम सेक्रेटरी और सेक्रेटरी (कार्मिक) का होना भी जरूरी है।

जबकि डीएसपीई अधिनियम, 1946 की धारा 4(1) के तहत विशेष परिस्थितियों में जैसे की अगर सीबीआई निदेशक पर भ्रस्टाचार या हत्या या किसी भी तरह के अपराध में शामिल पाए जाने के गंभीर आरोप लगते हैं तब सरकार सीबीआई के डायरेक्टर को छुट्टी पर भेजने का अधिकार रखती है लेकिन ट्रांसफर या निलंबित नहीं कर सकती है।

चूँकि सीबीआई कार्मिक विभाग के अंतर्गत आता है और कार्मिक विभाग का मुखिया प्रधानमन्त्री होते हैं इसलिए ऐसी परिस्थितियों में निष्पक्ष जांच के लिए प्रधानमंत्री, सीबीआई डायरेक्टर को छुट्टी पर भेज सकते हैं।



आपको क्या लगता है क्या सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का प्रधानमन्त्री मोदी का फैसला सही है या गलत? कमेंट कर के जरूर बताएं।

आपको ये जानकारी कैसी लगी, इस बारे में कमेंट कर के जरूर बताइएगा। ऐसे हीं बेहतरीन Article पढने के लिए हमारे न्यूजलेटर को सब्सक्राइब करना न भूलें। लाइक करें हमारे Facebook Page को और इससे संबंधित विडियो देखने के लिए सब्सक्राइब करें हमारे YouTube Channel को।



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