भारत का एक ऐसा गाँव जहाँ रहते है सिर्फ भूत-प्रेत, रात में रूकने पर हो जाती है मौत

भारत का एक ऐसा गांव जहां रात होते ही नाचने लगती है चुड़ैल, चिल्लाने लगते हैं भूत व हवा में मंडराते हैं प्रेत के साये। दिन भर लोगों से गुलजार रहने वाला ये गांव रात होते हीं भयानक हो जाता है। हम बात कर रहे हैं राजस्थान के जयपुर से 1200 किलोमीटर और जैसलमेर से 18 किलोमीटर दूरी बसे कुलधरा गाँव की।

कुलधरा गांव की कहानी-

कुलधरा गांव
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कहा जाता है कि यहां पर काफी संख्या में लोग रहा करते थे जिसमें एक मुखिया भी हुआ करता था ,मुखिया की एक सुंदर पुत्री भी थी यह बात कुलधरा गाँव से बाहर निकली और जैसलमेर राज्य तक पहुंची। जब इसका पता सलीम सिंह को चला तो वह उस सुंदर कन्या पर रूप मोहित हो गया इस कारण उसने गाँव वालों पर दबाव बनाने लगा। सलीम सिंह चाहता था कि वह मुखिया की पुत्री से शादी करे लेकिन गाँव वाले कतई नहीं चाहते थे ब्राह्मण समाज का नाम छोटा पड़े।

इस कारण गाँव के मुखिया ने एक रात सभा बुलाई और सभी ने फैसला लिया कि हम लोग रातों रात यह गाँव छोड़कर चले जाएंगे ,अन्यथा यह गाँव की कन्या से शादी कर देगा। फिर एक रात सभी गांववाले पूरा गाँव को छोड़कर किसी दूसरे गाँव में चले गए। लोगों का कहना है कि ये गाँव वाले जाते -जाते यह श्राप भी देकर गए थे कि यहाँ फिर कोई नहीं बस पायेगा इसलिए वर्तमान में यह राजस्थान के जैसलमेर का गाँव एक शापित गाँव कहलाता है।

कुलधरा गांव
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तब से यह गांव आज तक वीराना बना हुआ है। कहते हैं यहां रात में अजब-अजब सी आवाजे आती है। चुड़ैलें जोर-जोर से पायल बजाती हुयी नाचती हैं। भूत प्रेत हवा में उड़ते हुये दिखते हैं। इसी वजह से इस गांव के बाहर एक बड़ा सा दरवाजा बना दिया है। हालांकि दिन में इस दरवाजे से गांव में जाकर लोग घूम सकते हैं। लेकिन शाम होने के बाद कोई जानवर भी भूल कर गाँव के अंदर नहीं जाता।

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पालीवाल समुदाय के इस इलाके में 84 गांव थे और यह उनमें से एक गांव था। कुलधरा गांव पूर्ण रूप से वैज्ञानिक तौर पर बना हुआ है। ईट पत्थर से बने इस गांव की बनावट ऐसी है कि यहां कभी आपको गर्मी का एहसास नहीं होगा। कुलधरा के यह घर रेगिस्तान में भी ठंडक का अहसास देते हैं। यदि आप भरी गर्मी में 50 डिग्री तापमान पर भी इन घरों में जायेंगे तो भी आपको शीतलता का अनुभव होगा। घर के भीतर पानी के कुंड तक और सीढ़ियां बनी हुयी है।

पैरानॉर्मल सोसायटी कर चुकी है दौरा-

दिल्ली से आयी पैरानॉर्मल सोसायटी टीम ने मई 2013 में कुलधरा गांव में एक रात बितायी थी। टीम ने माना कि यहां कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर है। टीम के ही एक सदस्य ने बताया कि रात में कयी बार उसने महसूस किया कि किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा है जबकि मुड़कर देखा तो वहाँ कोई नहीं था।

भूत,प्रेत व आत्माओं पर खोज करने वाली इस टीम के उपाध्यक्ष अंशुल शर्मा ने बताया कि हमारे पास एक ऐसी मशीन है, जिसका नाम घोस्ट बॉक्स है। इसके माध्यम से हम ऐसी जगहों पर रहने वाली आत्माओं से सवाल पूछते हैं। कुलधरा में ऐसा ही किया। जहां कुछ आवाजें तो असामान्य रूप से आयी तो कहीं कुछ आत्माओं ने अपने नाम भी बताये। रात्रि में जो टीम कुलधरा गयी थी। उनकी गाड़ियों पर बच्चों के हाथ के निशान भी मिले हैं। गाड़ियों के कांच पर बच्चों के पंजे के निशान दिखायी दिये थे।

अगर आप भी कभी यहां गये हैं या फिर आपने भूत या चुड़ैल को देखा है तो हमे कमेंट में जरूर बताइये। अगर आपको लगता है कि भूत होते है या और भी कोई जगह ऐसा गाँव है जहां भूतों का कब्जा है तो हमे जल्दी से लिख दीजिये और हमारे सभी पोस्ट पढने के लिए हमे सब्सक्राइब जरूर करें और लगातार अपडेट पाने के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक जरूर करें।

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