मंत्री फिरोज अहमद के जय श्री राम के नारे पर भड़के कट्टरपंथी, फतवे के बाद मंत्री ने माँगी माफी

बिहार विधानसभा में ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने वाले जनता दल(यूनाइटेड) के मंत्री खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद ने रविवार को माफी मांग ली। बिहार में अल्पसंख्यक मामलो के मंत्री खुर्शीद अहमद नीतीश कुमार के कैबिनेट के एकमात्र मुस्लिम चेहरा हैं। बिहार विधानसभा में 28 जुलाई को जेडीयू-बीजेपी गठबंधन ने जैसे ही विश्वास मत हासिल किया वैसे ही खुर्शीद ने ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाया था।

खुर्शीद के इस नारे से मुस्लिम संगठन और इमाम नाराज हो गए। इस नारे को लेकर इमारत-ए-शरिया ने उनके खिलाफ फतवा भी जारी किया था। फतवा जारी करने वाले मुफ्ती सुहैल ने कहा कि “खुर्शीद ने जय श्रीराम कहा और उन्होंने ये भी कहा कि वो राम और रहीम दोनों को मानते हैं. इस्लाम इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।”

जय श्री राम
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पूरे देश में मुस्लिम समुदाय ने खुर्शीद का विरोध किया। रविवार को नीतीश कुमार के आवास पर जद-यू अल्पसंख्यक बोर्ड की बैठक हुई। इस दौरान कुछ मुस्लिम नेता खुर्शीद पर भड़क गए और उनसे माफी की मांग की। अल्पसंख्यक नेताओं की नाराजगी को देखते हुए आखिरकार खुर्शीद ने नीतीश कुमार के सामने माफी मांगी।


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इमारत-ए-शरिया ने जारी किया था फतवा

बता दें कि फिरोज अहमद उर्फ खुर्शीद ने शनिवार को नीतीश के मंत्रिमंडल में एकमात्र मुस्लिम मंत्री के रूप में शपथ ली थी। विधानसभा परिसर में ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने पर उनके खिलाफ इमारत-ए-शरिया ने फतवा जारी कर दिया। फतवे में उन्हे इस्लाम से खारिज और मुर्तद (विश्वास नही करने वाला) करार दिया गया था। अगर फतवे की बात मानी जाए तो इससे खुर्शीद का निकाह भी खत्म हो गया है और उन्हें दोबारा निकाह करने के लिए फिर मुफ्ती से माफी मांगनी होगी।

जय श्री राम
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हालांकि खुर्शीद ने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने को सही ठहराते हुए अपने बचाव में कई तर्क भी दिए। उन्होंने कहा कि अगर जय श्रीराम के नारे लगाने से बिहार की दस करोड़ जनता का फायदा होता है, तो वह सुबह-शाम ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हमारे इस्लाम में नफरत करने की कोई जगह नहीं है, इस्लाम की बुनियाद मोहब्बत और प्रेम है। साथ हीं उन्होंने यह भी कहा कि, ‘मैं रहीम के साथ-साथ राम को भी पूजता हूं, खुदा हमारी आत्मा में बसते हैं।’

‘मेरा काम ही बताएगा कि मैं कौन हूं’

अहमद ने कहा, ‘भगवान ही जानता है कि मैंने किस इरादे से ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए थे. मेरा काम ही बताएगा कि मैं कौन हूं। मैं इमारत-ए-शरिया की काफी इज्जत करता हूं, लेकिन उन्हें फतवा जारी करने से पहले मेरे इरादों को समझना चाहिए था, आखिर मैं क्यों डरूं?’ जो इससे आहत हुए हैं मैं उनसे माफी मांगता हूं। मैंने किसी को भला-बुरा नहीं कहा है। किसी ने नहीं पूछा कि मेरे मन में क्या है।


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