धोती पहने शख्स को कोलकाता के मॉल में अंदर जाने की नही मिली इजाजत

हमारे देश में पश्चिमी तौर-तरीके किस तरह से हावी है उसका एक उदाहरण शनिवार को कोलकाता में तब देखने को मिला जब एक व्यक्ति को मॉल में सिर्फ इसलिए जाने से रोक दिया गया जब उसने पश्चिमी कपड़ों की जगह परंपरागत धोती पहन रखी थी। वह व्यक्ति और कोई नही बल्कि कोलकाता के फिल्मकार आशीष अविकुंठक थे। इस घटना के समय आशीष के साथ उनकी महिला मित्र देबलीना सेन भी थी।

धोती
Image Source: Facebook

देबलीना ने अपने फेसबुक पोस्ट पर इस घटना का जिक्र करते हुए लिखा है कि, ‘एक और घटना, रेस्ट्रॉन्ट्स के द्वारा मना करने के बाद अब मॉल ने भी किसी की एंट्री रोकी। धोती-कुर्ता पहने एक शख्स को आज कोलकाता के क्वेस्ट मॉल में नहीं जाने दिया गया। इस मॉल विशेष में धोती या लुंगी पहनकर आने की इजाजत नहीं है।’ वहीं आशीष अविकुंठक ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि, ‘धोती पहनने की वजह से उन्हे मॉल के अंदर जाने की इजाजत नही मिली थी’।


बकौल आशीष, जब वो देबलीना के साथ क्वेस्ट मॉल में पहुँचे तो गार्ड्स ने उन्हे अंदर जाने से रोक दिया। लेकिन जब उन्होने गार्ड्स से इंग्लिश में सवाल-जवाब करना शुरू किया तब उसने अपने वॉकी-टॉकी पर किसी से बात की और फिर अन्दर जाने की अनुमति दे दी। जब उन्होने मॉल के मैनेजमेंट से इस बारे में शिकायत दर्ज करायी तो मैनेजमेंट का कहना था कि धोती या लुंगी पहने किसी भी शख्स को मॉल में आने की इजाजत नहीं है।


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इससे पहले दिल्ली के गोल्फ क्लब में भी एक महिला को सिर्फ इसलिए एंट्री नही दी गई थी क्यूँकि वो पूर्वोतर भारत की रहने वाली थी और अपने परंपरागत “खासी” परिधान में क्लब के अंदर जाना चाहती थी। पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण करते हुए भारतीय परिधान को नीचा दिखाने की परंपरा तेजी से बढ रही है। अभिव्यक्ति की आजादी का पक्षधर देश का बुद्धिजीवी वर्ग क्या इस पर अपना विरोध दर्ज कराएगा क्यूँकि ये भी व्यक्ति के पहनावे की आजादी का मामला है।

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