Makar Sankranti 2019: जानिए मकर संक्रांति कब है और इस दिन क्या करना चाहिए

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मकर संक्रांति परंपरागत रूप से 14 जनवरी को मनाई जाती आ रही है लेकिन 2012 से मकर संक्रांति की तिथि को लेकर उलझन की स्थिति बनती चली आ रही है। पिछले कुछ वर्षों में मकर संक्रांति 14 को मनाई जाएगी या 15 जनवरी को इस बात को लेकर सवाल सामने आने लगे हैं।

हर साल लोग यही पूछते हैं कि मकर संक्रांति कब है? साल 2019 में भी कुछ इसी तरह की स्थिति बनकर सामने आई है। Google Search के अलावा, कई कैलेंडर और पंचांग मकर संक्रांति की तिथि 14 जनवरी बता रहे हैं तो कई पंचांग 15 जनवरी को मकर संक्रांति बता रहे हैं।

मकर संक्रांति की सही तिथि

मकर संक्रांति

अगर आप भी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि मकर संक्रांति किस दिन मनाएं तो अपनी उलझन को दूर कर लीजिए। धार्मिक और ज्योतिष विषयों के जानकर पं. जयगोविंद शास्त्री बताते हैं कि इसमें कोई दो मत नहीं होना चाहिए कि इस साल मकर संक्रांति 15 जनवरी को है। दरअसल सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की शाम 7 बजकर 50 मिनट पर हो रहा है।


चूंकि सूर्य का राशि परिवर्तन सूर्यास्त के बाद होगा, इसके चलते पुण्यकाल और मकर संक्रांति के तहत 15 जनवरी को दान पुण्य का दौर होगा। मकर संक्रांति के साथ ही सूर्य दक्षिमायण से उत्तरायण हो जाएंगे। शास्त्रों के नियम के अनुसार रात में संक्रांति होने पर अगले दिन संक्रांति मनाई जाती है। इस नियम के अनुसार ही इस बार संक्रांति 14 नहीं 15 जनवरी को मनाई जाएगी।

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मकर संक्रांति मुहूर्त पुण्यकाल

मकर संक्रांति
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संक्रांति के पुण्य काल की जहां तक बात है तो नियम यह है कि संक्रांति से 6 घंटे पहले और बाद तक पुण्यकाल होता है इसलिए 14 जनवरी को 1 बजकर 26 मिनट से संक्रांति का स्नान दान किया जा सकेगा। सूर्य के उदया तिथि के नियामानुसार 15 जनवरी को भी ब्रह्ममुहूर्त से पूरे दिन संक्रांति का स्नान दान किया जा सकेगा।

मकर संक्रांती की पहली कथा

महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन को ही चुना था, क्योंकि मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं, इसलिए संक्रांति मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

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मकर संक्रांती की दूसरी कथा

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महाभारत की एक दूसरी कथा के अनुसार, युद्ध करते हुए भीष्म पितामह ने वचनबद्ध होने के कारण कौरव पक्ष की ओर से युद्ध किया था किंतु सत्य एवं न्याय की रक्षा के लिए उन्होंने स्वयं ही अपनी मृत्यु का सबसे बड़ा रहस्य अर्जुन को बताया था। अर्जुन ने शिखंडी की आड़ में भीष्म पितामह पर इस कदर बाणों की वर्षा की कि उनका पूरा शरीर बाणों से बिंध गया तथा वह बाण शय्या पर लेट गए किंतु उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति तथा प्रभु कृपा के चलते मृत्यु का वरण नहीं किया क्योंकि उस समय सूर्य दक्षिणायन था।

जैसे ही सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया और सूर्य उत्तरायण हुए। भीष्म ने अर्जुन के बाण से निकली गंगा की धार का पान कर प्राण त्याग कर मोक्ष प्राप्त किया। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करना उत्तर भारत में इसलिए भी काफी विशेष माना जाता है। मकर संक्रांति को सूर्य एवं अग्नि की पूजा से भी जोड़ा जाता है।

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मकर संक्रांति पर क्या करें

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ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार सोमवार को संक्रांति होने पर उसे ध्वांक्षी संक्रांति कहते हैं। सूर्य का प्रवेश चूंकि सोमवार की शाम में ही मकर राशि में हो रहा है इसलिए यह मकर संक्रांति ध्वांक्षी संक्रांति कहलाएगी। इस संक्रांति में दान का बड़ा महत्व बताया है। संक्रांति के दिन तिल का दान सबसे शुभ माना गया है, क्योंकि मान्यता है कि तिल शनि का द्रव्य है, तिल के जरिए इंसान अपने पूर्व जन्मों में किए गए पापों की माफी मांगता है।

इस कारण लोग इस दिन काले और सफेद तिल का दान करते हैं। कहते हैं संक्रांति में किया गया दान लोक-परलोक दोनों में ही सुख और समृद्धि प्रदान करता है। सक्रांति अवसर पर स्नान के बाद काले कंबल, ऊनी वस्त्र, जूते, भूमि, स्वर्ण, अन्न का दान कर सकते हैं। इस अवसर पर धार्मिक पुस्तकों का दान भी बहुत पुण्यदायी माना गया है, आप अपनी श्रद्धा के अनुसार रामायण या गीता दान कर सकते हैं।


मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान के बाद नया जनेऊ धारण कर जरूरत मंद लोगों को भोजन अवश्य करना चाहिए और भोजन कराने के बाद कुछ चीज दान अवश्य करनी चाहिए। इससे आपके पूर्व जन्मों में किए गए पापों से मुक्ती मिल जाती है। कहा जाता है की इस दिन सूर्य का मकर में प्रवेश होने से ही सारे शुभ काम शुरु हो जाते हैं, क्योंकि खरमास समाप्त हो जाता है। जैसे बच्चों के मुंडन, छेदन संस्कार आदि।


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News Source: NBT

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