जानिए आचार्य चाणक्य के बारे में कुछ रोचक तथ्य

आचार्य चाणक्य के बारे में कौन नही जानता है? चाणक्य एक बहुत हीं महान दार्शनिक, शिक्षक, अर्थशास्त्र के ज्ञाता, न्यायिक और मौर्य वंश के सम्राट चन्द्रगुप्त के सलाहकार थे। इन्ही के दिखाए रास्ते पर चलकर चन्द्रगुप्त ने पुरे भारत पर अपनी विजय पताका फहराया और टूकड़ों में बँटे भारत को एक सूत्र में पिरोया। बाद में चाणक्य ने वहाँ की प्रजा के मार्गदर्शन के लिए एक नीतिशास्त्र की रचना की जिसे आज हम चाणक्य नीति के नाम से जानते हैं।

चाणक्य के बारे में कुछ मजेदार और रोचक तथ्य:-

रोचक तथ्य

1) आचार्य चाणक्य का जन्म 371 ईसा पूर्व में एक ब्राहम्ण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम चाणक था और वे एक शिक्षक थे। इनका गोत्र कोटिल होने के कारण इन्हे कौटिल्य नाम से भी जाना जाता है। पिताजी के नाम के कारण इनका नाम चाणक्य पड़ा हालांकि इनका असली नाम विष्णुगुप्त था जो कि इनके पिताजी ने ही रखा था।

2) चाणक्य बहुत हीं बुद्धिमान तथा दूरदर्शी थे। वे भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का पहले से हीं अनुमान लगा लेते थे और फिर उससे बचाव की योजना भी तैयार कर लेते थे।

3) चाणक्य को खगोल विज्ञान और समुद्रशास्त्र में महारत हासिल थी। इसी कारण वे किसी भी व्यक्ति के चेहरे के भावों को देख कर उसके मन की बातों को जान जाते थे।

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4) चाणक्य तक्षशिला युनिवर्सिटी में अध्यापक थे। किसी कारणवश उन्हे मगध के राजा धनानंद के दरबार में जाना पड़ा जहाँ धनानंद ने भरी सभा में उनका अपमान कर दिया। तब चाणक्य ने अपनी चोटी खोल कर शपथ ली कि जब तक नंद साम्राज्य का सर्वनाश नही कर दूँगा तब तक चोटी में गाँठ नही लगाउंगा।

5) एक दिन उनकी मुलाकात चन्द्रगुप्त से हुई और उससे थोड़ी देर बातचीत के बाद ही चाणक्य समझ गए कि इस बालक में राजसी गुण है और फिर उन्होने चन्द्रगुप्त को हर तरह से शिक्षित किया। उसके बाद चन्द्रगुप्त के हाथों ही नन्द वंश का सर्वनाश करवाया।

6) ऐसा कहा जाता है कि चाणक्य अपने प्रिय शिष्य चन्द्रगुप्त मौर्य को भोजन के माध्यम से थोड़ा-थोड़ा जहर दिया करते थे ताकि जब कोई दुश्मन उन्हे जहर देकर मारने की कोशिश करे तो उन पर कोई असर न हो। लेकिन एक दिन चन्द्रगुप्त की पत्नी के जिद पर चन्द्रगुप्त ने उन्हे अपना खाना खिला दिया। रानी गर्भवती थी इसलिए जहर उनपर तेजी से असर किया जिस कारण उनकी मृत्यु हो गई लेकिन चाणक्य ने उनका पेट काट कर बच्चे को बचा लिया। जहर के असर से बच्चे के माथे पर एक निशान पड़ गया जिस कारण बच्चे का नाम बिन्दुसार रखा गया।

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7) चन्द्रगुप्त मौर्य अपना कोई भी काम बिना चाणक्य के सलाह लिए नही करते थे।

8) चाणक्य को राजनीति, कूटनीति और युद्धनीति का इतना अच्छा ज्ञान था कि उनके बनाए रणनीति का पालन कर के चन्द्रगुप्त ने मगध का साम्राज्य अफगानिस्तान तक फैला लिया था।

9) एक बार बिन्दुसार के मंत्री सुबंधु ने बिन्दुसार को यह कह कर बहका दिया कि उनकी माता की मृत्यु का कारण चाणक्य ही थे जिस कारण बिन्दुसार, चाणक्य पर क्रोधित हो गए। यह देखकर चाणक्य ने खाना-पीना छोड़ दिया और जंगल में जाकर रहने लगे। बाद में जब बिंदुसार को सच्चाई पता चली तो वे शर्मिंदा हुए और चाणक्य को मनाने के लिए जंगल में गए लेकिन चाणक्य नही माने और वहीं बाद में उन्होने अपना शरीर त्याग दिया।

10) चाणक्य की मृत्यु 88 साल की उम्र में 283 ईसा पूर्व में हुई थी।



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