भारत में प्रचलित कुछ अंधविश्वास और उनके पीछे छुपी सच्चाई

भारत देश विविध सभ्यता और संस्कृतियों वाला देश है। यहाँ बहुत सारे धर्मों के लोग रहते हैं और सभी की अपनी-अपनी मान्यताएं हैं। कुछ मान्यताएं तो इतनी पूरानी है कि अब अन्धविश्वास का रूप ले चुकी है। पुराने जमाने में हमारे पूर्वजों ने उन मान्यताओं को स्थापित करते वक्त अपनी आने वाली पीढियों का भला हीं सोचा होगा लेकिन हम लोगों ने उन मान्यताओं को अन्धविश्वास में बदल कर उसे डर का एक रूप दे चुके हैं।

आज के तकनीक और विज्ञान के युग में ऐसे अन्धविश्वासों की कोई जगह नही है लेकिन फिर भी लोग इस डर से कि कहीं कुछ बुरा न हो जाए, इन अन्धविश्वासों को ढोये चले जा रहे हैं। आज हम इन मान्यताओं के पीछे छुपे वैज्ञानिक तर्कों के सहारे आपके दिल में छुपे उस डर को दूर करने की कोशिश करेंगे। तो आइये जानते हैं हमारे समाज में फैले ऐसे हीं 10 अन्धविश्वासों और उनके पीछे वैज्ञानिक तथ्य के बारे में।

1) घर से बाहर निकलते वक्त दही और चीनी खाना

भारत में प्रचलित कुछ अंधविश्वास और उनके पीछे छुपी सच्चाई

जिस वक्त हमारे पूर्वजों ने ये मान्यता बनाई थी उस वक्त हमारे देश की चिकित्सा व्यवस्था आधुनिक नही थी इसलिए उन लोगों घर से बाहर निकलने से पहले दही और चीनी खाने पर जोर दिया। इसके पीछे का तर्क ये था कि हमारे देश में गर्मी बहुत ज्यादा पड़ती है और दही की तासीर ठंडी होती है। ऐसे में अगर आप दही में चीनी मिला कर खाते हैं तो वो शरीर के लिए ग्लूकोज का काम करता है और इससे बाहर के गर्म वातावरण में भी शरीर को एनर्जी मिलती है।

लेकिन हम भारतीयों ने समय के साथ इस परंपरा को एक अंधविश्वास का रुप दे दिया और ये मानने लगे कि दही-चीनी खाकर घर से निकलने पर हमारी किस्मत हमारा साथ देती है और हमारे सारे काम आसानी से बन जाते हैं या पूरे हो जाते हैं।

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2) सप्ताह में कुछ खास दिन हीं बाल धोने चाहिए

जिस समय यह नियम बनाया गया था उस समय हमारे देश में पानी का मुख्य स्त्रोत कुंआं, तालाब और नदी हुआ करते थे। आज की तरह हमे पानी आसानी से उपलब्ध नही था। पानी को दूर से लाना पड़ता था ऐसे में हमारे पूर्वजों ने पानी बचाने के लिए यह नियम बनाया कि हमें कभी-कभी या एक दिन छोड़कर बाल धोना चाहिए लेकिन समय बीतने के साथ-साथ लोगों ने इसे अंधविश्वास का रूप दे दिया।

3) शाम के समय झाड़ू नही लगाना चाहिए।

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एक अंधविश्वास ये भी है कि सूरज डूबने के बाद घर में झाड़ू नही लगाना चाहिए ऐसा करने से बुरा समय आता है। लेकिन हमारे पूर्वजों ने जब ये नियम बनाया था उस वक्त इस बात के मायने कुछ और थे। पुराने जमाने में बिजली नही होने के कारण रात में लोग दीप जलाते थे जिससे बहुत कम रोशनी होती थी। अगर कोई कीमती चीज रात में गिर जाती और उसी वक्त झाड़ू लगा दिया जाता तो वो चीज के मिलने की संभावना समाप्त हो जाती थी। इन्ही सब परेशानियों से बचने के लिए शाम के समय झाड़ू नहीं लगाने का नियम बनाया गया लेकिन आज हमारे समाज ने इसे अंधविश्वास का रूप दे दिया।

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4) अंतिम संस्कार से लौटने के बाद स्नान करना

हमारे पूर्वजों ने उस समय के लोगों की भलाई के लिए कई नियम बनाए थे जिनमे से एक नियम था कि किसी भी अंतिम संस्कार से लौटने के बाद हमें नहाना जरूर चाहिए। इसके पीछे का कारण लोगों को भयंकर बीमारियों से बचाना था। उस वक्त चिकित्सीय सुविधाएं इतनी आधुनिक नही थी इसलिए इस तरह की मान्यता बनाई गई लेकिन लोगों ने इसमें भी अंधविश्वास ढूंढ लिया।

5) सूर्यग्रहण के दौरान बाहर नही निकलना चाहिए

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आज भी जब सूर्यग्रहण लगता है तब वैज्ञानिक कहते हैं कि हमें नंगी आँखों से ग्रहण नही देखना चाहिए नही तो सूर्य से निकला तेज प्रकाश हमारी आँखों को नुकसान पहुँचा सकता है। हमारे पूर्वज भी इस बात को जानते थे इसलिए उनलोगों ने ऐसा नियाम बनाया कि सूर्यग्रहण के दौरान कोई भी अपने घर से बाहर नही निकलेगा लेकिन आज हम लोगों ने इसे भी अंधविश्वास की श्रेणी में शामिल कर दिया है।

6) रात को पेड़ों के नीचे नही सोना चाहिए

आधुनिक विज्ञान कहता है कि पौधे सूरज की रोशनी और कार्बन डाई ऑक्साइड से प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया के द्वारा अपना खाना बनाते हैं। इस दौरान वे ऑक्सीजन छोड़ते हैं और कार्बन डाई ऑक्साइड लेते हैं। लेकिन रात के समय सभी जीवित प्राणियों की तरह पौधे भी ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं जिससे पौधों के नीचे कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा अधिक हो जाती है और उसके नीचे सोने वाले लोगों की दम घूटने से मृत्यु तक हो जाती है। ये बात हमारे पूर्वज जानते थे इसलिये उन्होने रात में पेड़-पौधों के नीचे न सोने का नियम बना दिया लेकिन समय बीतने के साथ लोगों ने इसे अंधविश्वास में बदल दिया और साथ में ये अफवाह भी जोड़ दिया कि पेड़-पौधों विशेषकर पीपल पर भूत रहते हैं।

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7) सूरज डूबने के बाद नाखून नही काटना चाहिए।

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पूराने जमाने में रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नही होती थी और नाखून काटने के लिए धारदार उस्तरा का प्रयोग किया जाता था। कम रोशनी में नाखून काटने के कारण हाथ या पैरों की उँगलियों के कटने का भी डर बना रहता था। इसलिए हमारे बड़े-बुजुर्गों ने अंधेरा होने के बाद नाखून काटने से मना किया था लेकिन समय बीतने के साथ यह एक अंधविश्वास बन गया।

8) उत्तर दिशा की तरफ सिर करके नही सोना चाहिए

आधुनिक विज्ञान कहता है कि पृथ्वी में चुम्बकीय शक्ति होती है और इसमें दक्षिण से उत्तर की ओर लगातार चुंबकीय धारा प्रवाहित होती रहती है। जब हम दक्षिण की ओर सिर करके सोते हैं, तो यह ऊर्जा हमारे सिर की ओर से प्रवेश करती है और पैरों की ओर से बाहर निकल जाती है. ऐसे में सुबह जगने पर लोगों को ताजगी और स्फूर्ति महसूस होती है। ये बातें हमारे पूर्वज समझ गए थे इसलिए उन्होने उत्तर दिशा की तरफ सिर करके नही सोने का नियम बनाया। लेकिन आज लोगों ने इसे अंधविश्वास मानते हुए मृत्यु से जोड़ दिया।

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9) बुरी नजर से बचाने के लिए नींबू-मिर्ची का इस्तेमाल करना

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नींबू और मिर्ची में विटामिन सी बहुतायत में पाया जाता है। हमारे पूर्वज शरीर पर नींबू और मिर्ची के गुणकारी प्रभाव के बारे में जानते थे इसलिए हर शादी-ब्याह में नींबू-मिर्ची का प्रयोग जरूर किया जाता था। बाद में लोगों ने नींबू-मिर्ची को बूरी नजरों से बचाने वाला समझने लगे और अपने घरों या दुकानों में टाँगने लगे।

10) नदी में सिक्के फेंकना

पूराने जमाने में सिक्के पीतल या तांबा के हुआ करते थे और पीतल या तांबा पानी के साथ मिलकर पानी को स्वच्छ कर देते है और उसे किटाणु रहित कर डालते हैं और उस पानी में ताँबा और पीतल के भी गुण आ जाते हैं। उस पानी को पीने से हमारे शरीर को कई फायदे भी होते हैं। चूँकि उस वक्त पीने के लिए पानी नदियों, तालाबों या कुएँ से ही लाया जाता था इसलिए हमारे पूर्वज नदियों या तालाबों में तांबे या पीतल के सिक्के डाल देते थे। लेकिन आज लोगों ने इसे अंधविश्वास से जोड़ते हुए इसका मतलब ये निकाल लिया है कि पानी में सिक्का फेंकने से मन्नत पूरी होती है।

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