चीन पर भारत हुआ सख्त, लगाई अरबों की डील पर रोक

डोकलाम में सीमा विवाद के चलते बीते कुछ दिनों से भारत-चीन की बीच दूरियाँ बढ़ती जा रही है। 1962 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी इलाके में भारत और चीन की सेनाएँ एक-दूसरे के आमने-सामने इतने लंबे समय से डटी हुई है। चीनी मीडिया द्वारा बार-बार धमकाए जाने और सीमा पर चीनी सैनिकों के उग्र रवैये के बीच भारत ने बहुत हीं खामोशी से चीन को एक बड़ा झटका दिया है। चीनी कंपनी की भारतीय कंपनी के साथ होने वाली अरबों की डील में पेंच फंसाकर भारत ने चीन को अपने ही अंदाज में जवाब दिया है।

अरबों की डील
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दरअसल, चीनी कंपनी शंघाई फोसुन, भारतीय कंपनी ग्लैंड फार्मा में 8800 करोड़ रूपए की हिस्‍सेदारी खरीदना चाहती थी लेकिन कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने इस प्रपोजल पर आपत्तियां लगा दी हैं। इस डील में की गई आपत्ति को भारत और चीन के बीच जारी बॉर्डर विवाद से जोड़ कर भी देखा जा रहा है।


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हालांकि इस प्रपोजल को मंजूरी नहीं देने के पीछे वजह बताई गई है कि “हैदराबाद की ग्लैंड फार्मा के पास मॉडर्न इंजेक्टेबल टेक्नोलॉजी है, जो इस डील के चलते विदेशी हाथों में चली जाएगी।” गौरतलब है कि चीनी कंपनी ने अपनी सब्सिडियरी कंपनियों फोसुन फार्मा इंडस्ट्रियल लि., फोसुन इंडस्ट्रियल कंपनी लि., एंपिल अप लि., लस्टरस स्टार लि. और रीगल गेस्चर लि. के माध्यम से ग्लैंड फार्मा की स्टेक खरीदने का प्रपोजल रखा था।

अरबों की डील
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अगर यह डील सफल हो जाती तो इससे फोसुन को ग्लैंड फार्मा के सारे शेयर्स खरीदने के अधिकार मिल जाते। डील फाइनल होते हीं फोसुन कंपनी, ग्लैंड फार्मा के अन्य स्टेकहोल्डर्स से एक या कई किस्तों में कंपनी की 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने में सक्षम हो जाती। बता दें कि एफआईपीबी को 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के प्रपोजल्स को मंजूरी देने के लिए सीसीईए के अप्रूवल की जरूरत होती है।


इसके अलावा भारत ने चीन के कई प्रोडक्ट्स पर एंटी डंपिंग ड्यूटी भी लगा दिया है। पिछले कुछ महीनों में चीन से इंपोर्ट होने वाले कई प्रोडक्‍ट्स जैसे रेडियल टायर, सोलर प्रोडक्‍ट, स्‍टील और सेरेमिक आइटम्‍स इत्यादि प्रमुख आइटम्स पर भारत ने एंटी डंपिंग ड्यूटी भी लगा कर चीन को करारा झटका दिया है जिस कारण इससे चीन की कमाई पर भी असर पड़ सकता है।



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