सावधान, अपने बच्चे को हॉस्टल भेजकर कहीं आप गलती तो नहीं कर रहे?

हॉस्टल… एक जमाना था जब हम रोजाना एक घंटे की पगयात्रा करके मास्टर जी के पास जाकर पढ़ा करते थे और देरी होने पर फ्री में मन भर कुटाई भी खा लिया करते थे। इससे हमारे हमारे पिताजी बहुत ही खुश हुआ करते थे कि चलो भाई, हमारा बच्चा पढ़ रहा है और गलती करने पर मार भी खा रहा है। लेकिन आजकल के अभिभावक अपने बच्चों के प्रति इतने संवेदनशील और नर्म हो गए हैं कि उनसे अपने बच्चे का पिटा हुआ शक्ल अच्छा नहीं लगता है। वो चाहते हैं कि उनका बच्चा पूरी दुनिया में टॉप आये, लेकिन बिना एक भी छड़ी मार खाए।

Hostel school students

ऐसे अभिभावकों के ऐसे ही समस्या का समाधान खुद आज के गुरुदेव ने ही निकाल दिया है और उस समाधान को ही आजकल हॉस्टल के नाम से जाना जाता है। जी हाँ, जब बच्चे हॉस्टल में ही रहेंगे तो भला उन्हें तो कभी स्कूल अटेंड करने में दिक्कत तो होगी नहीं। तो फिर, न तो उनका बच्चा पिटाई खायेगा और न ही किसी को अपने बच्चे का पिटा हुआ मुंह दिखेगा। लेकिन साथ-ही-साथ लोग समझते हैं कि चलो बच्चा 24 घंटे मास्टर साहब की निगरानी में है तो पढ़-लिखकर कम-से-कम इंजीनियर तो बन ही जायेगा।

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यदि आप भी ऐसे ही सोच रखने वालों में से हैं तो आपकी ये सोच बिल्कुल ही गलत है। जितना आपके बच्चे आपके सामने रहकर पढ़ाई कर सकते हैं उतना वो अकेले में कभी भी नहीं कर सकते। यदि कायदे और इंसानियत की नजर से देखा जाए तो आप अपने बच्चे के साथ बहुत ही बड़ी नाइंसाफी कर रहे हैं। साथ ही यदि ये कहा जाए कि आप ऐसा करके खुद अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। लेकिन क्यों, आखिर क्यों कह रहा हूँ मैं ऐसा? क्या सच में ऐसी कोई वजह है? जी हाँ, ऐसे एक नहीं सैकड़ों वजह है। तो चलिए, जानते हैं उनमें से कुछ वजहों के बारे में विस्तार से…..

बच्चे के हॉस्टल में भर्ती कराने से क्या-क्या नुकसान हैं?

1) जैसा कि आप जानते ही होंगे कि एक बच्चे के लिए हॉस्टल की फीस आजकल किसी नॉर्मल स्कूल में भी 3000 रूपये से कम नहीं है। लेकिन फिर भी यदि इससे हमारे बच्चे के भविष्य सही होते हों तो इन रुपयों के लिए कोई चिंता की बात नहीं है।

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2) किसी भी बच्चे का ह्रदय बहुत ही कोमल होता है और उसे शुरुआत में जिस ढाँचे में पाला-पोसा जाता है वो उसी लायक बन जाता है। यदि आप अपने बच्चे को अपने जैसे अच्छे संस्कार देना चाहते हैं और उसे अपने रीति रिवाजों के अनुसार ढालना चाहते हैं तब तो उसे भूलकर भी हॉस्टल न भेजें। कम-से-कम तो उसके 10 साल के उम्र तक उसे अपने ही पास रखें और उसे नार्मल तरीके से स्कूल भेजें। यदि स्कूल आपके घर से दूर हों तो आप चाहें तो उसके लिए स्कूल वाहन के लिए उस स्कूल में अप्लाई कर सकते हैं।

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3) यदि आप शुरू से ही अपने बच्चे को हॉस्टल में डाल देंगे तो इस बात का ध्यान रहे कि बच्चे की याददाश्त लगभग उसी समय से संभलना शुरू होता है। ऐसे में, आपके बच्चे आपको पहचानने से इंकार कर सकते हैं भविष्य में। लेकिन चूंकि आप लगातार अपने बच्चे से मिलते रहेंगे, इसलिए वो आपको पहचानेंगे तो जरूर लेकिन आपको या आपके किसी भी सदस्य को कभी उतनी इज्जत नहीं दे पायेगा जितना कि आपको उससे उम्मीद होगी।

4) यदि आपका बच्चा शुरू से ही हॉस्टल में रह रहा है और आप उससे लगातार मिल रहे हैं तो ऐसे में वो थोडा बहुत आपको तो पहचानेगा ही, लेकिन आपके किसी दूसरे रिश्तेदार के साथ वो कभी घुल-मिल नहीं पायेगा।

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5) जब बच्चा 4 – 5 का होता है तो तो इस समय उसकी उम्र खेलने-कूदने की होती है और वो जब चाहे अपने इच्छा से खेल सकता है। लेकिन जब इस उम्र में ही आप उसे हॉस्टल में भेज देते हैं तो वो टीचर के डर से पढने तो लग ही जाते हैं और खेलने का भी समय उन्हें मिल ही जाता है लेकिन उसका एक लिमिट होता है। वो अपने इच्छानुसार खेलकूद नहीं कर पाते हैं और अपने-आप को जेल में बंद एक कैदी को समान समझने लगता है। और इसी वजह से उसके मन में अपने अभिभावक के प्रति भी गलत सोच पैदा होने लग जाती है।

Stedents playing in playground

6) बच्चे का मन बहुत ही कोमल होता है और उससे उसके हिसाब से काम करवाने में ही फायदा है। लेकिन जब उसे हॉस्टल भेज दिया जाता है तब उसे वहां के नियमों के अनुसार ही काम करना पड़ता है और एक फिक्स टाइम में पढना भी पड़ता है। ये बात उसके मानसिकता के लिए सही नहीं होता है और वो भावनात्मक रूप से कमजोर हो सकता है।

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7) आप अपने घर में खुद तो तरह-तरह के पकवान और मिठाइयाँ खाते होंगे लेकिन हॉस्टल में रह रहे अपने बच्चे के बारे में भी कभी आपने सोचा है? एक तो खाना भी उसे 3 – 4 फिक्स टाइम में मिलता है और जब कभी भी बेसमय भूख लग जाए तो मजबूरन मन-मसोसकर उसे भूख बर्दाश्त करना पड़ जाता है। लेकिन यही वो समय होता है जब आपके बच्चे आपके बारे में सोच रहे होंगे कि खुद तो 56 तरह के भोजन कर रहे होंगे और यहाँ हमें भूख से मरने छोड़ दिया। इसके बाद आप कितनी भी कोशिश कर लें, वो कभी भी आपसे सही से घुल-मिल नहीं पाएंगे।

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8) हरेक बच्चे का शौक होता है कि वो तरह-तरह के जगह पर घूमने जाए और जरा घर के बाहर की दुनिया को भी देखा जाए। लेकिन आप तो उसे हॉस्टल में बंद करवा चुके होंगे, तो ऐसे में तो रात को वो यही सोचकर रोता होगा कि काश! कभी मैं इस स्कूल की चहारदीवारी बाहर निकल पाता। काश कि इससे बाहर की दुनिया को भी अपनी आँखों से देख पाता। लेकिन, ऐसा तो उनके जीवन में तब तक संभव नहीं होगा जब कि किसी त्यौहार के मौके पर आप उसे अपने घर लेकर न चला जाएँ।

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