अपने बच्चों के साथ कठोरता से पेश आना किस हद तक सही है?

बच्चों की परवरिश करना जहाँ किसी भी अभिभावक के लिए बहुत ही रोमांचकारी होता है तो वहीँ बहुत ही मुश्किल भी होता है। रोमांचकारी इसलिए होता है क्योंकि बच्चे के एक-एक करतब उन्हें हंसाते रहते हैं जबकि मुश्किल इसलिए होता है क्योंकि बहुत सारे बच्चे जिद्दी टाइप के होते हैं और अक्सर वही काम करते हैं जो कि उन्हें नहीं करना चाहिए होता है। बच्चों को सही और गलत की कोई समझ ही नहीं होती है।

यदि उन्हें गलत कामों को करने में भी मजा आ रहा है तो वो वही करेंगे। हालांकि, बहुत सारे अभिभावक इसे बचपना समझकर गंभीरता से नहीं लेते और बच्चों को थोडा-बहुत समझाने के बाद उन्हें समझाना छोड़ देते हैं। लेकिन ये उनकी सबसे बड़ी गलती साबित होती है। ऐसे बच्चे आगे चलकर बहुत ही जिद्दी टाइप के हो जाते हैं और अपने अभिभावक को अपने अंगुली पर नचाने लगते हैं।


Stubborn baby with his father
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यदि उनकी बात नहीं मानी जाए तो वे पूरा आसमान ही अपने सर पर उठा लेते हैं और तब हमें उनके बात को मानना पड़ जाता है। लेकिन यदि अभिभावक अपने बच्चों की गलतियों के बारे में शुरू से ही उन्हें बताते रहे और यदि वो गलती जरा सा भी गंभीर हो तो उन्हें उचित दंड देते रहे तो ऐसे बच्चों के भविष्य में एक नेक इंसान बनने की बहुत संभावना बनी रहती है।लेकिन बहुत सारे अभिभावक इस मामले में पिछड़ जाते हैं तो बहुत सारे अभिभावक इस मामले को इतना सीरियस ले लेते हैं कि उन्हें समझ ही नहीं आता कि कब उन्होंने खुद अपने ही हाथों से अपने बच्चों के भविष्य को खराब कर दिया होता है।

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जी हाँ, आप बिल्कुल सही सुन रहे हैं और ये एक बहुत ही गंभीर मामला है। दरअसल बहुत सारे अभिभावकों में ऐसा देखा गया है कि वो अपने बच्चे की जरा-सी गलती पर भी उन्हें बहुत ही बुरे तरीके से डांट देते हैं और यदि उनका मूड थोडा-सा खराब हो जाए तो बिना किसी गलती के भी बस किसी भी एक प्वाइंट को पकड़कर उस पर बहस चालू कर देते हैं और बेवजह बच्चों को पीट बैठते हैं।

अधिकतर ग्रामीण मामलों में तो यहाँ तक देखा गया है कि छोटे-से मिस्टेक के लिए भी चमड़ी उधेड़ दिया जाता है और तरह-तरह के गालियों की बौछार कर दी जाती है। ऐसा करते हुए वे सोचते है कि ऐसे में उनका बच्चा संस्कारी होगा और शासन के अन्दर रहेगा लेकिन ये भूल जाते हैं कि उन्हें अपने बच्चे पर शासन नहीं करना है बल्कि उसे एक अच्छा संस्कार देना है जो कि सख्ती अपनाने से तो कभी हो ही नहीं सकता।

यदि आप भी कुछ ऐसा ही करते हैं तो सतर्क हो जाइये। यदि आप भी अपने बच्चे को हमेशा डरा-धमकाकर रखते हैं तो इससे आपको बहुत ही बड़ा नुकसान हो सकता है। जी हाँ, कहीं ऐसा न हो कि आपके बच्चे आपसे डरते-डरते पूरी दुनिया से ही डरने लगे और कोई भी पहलवान बनकर उसे कूट डाले। हमने अक्सर ऐसा देखा है कि जिन बच्चों के अभिभावक उसे बहुत ही पीटते हैं वो बच्चा जरा-सा संस्कारी जरूर बन जाता है लेकिन रहना उसे पूरी दुनिया के लोगों के पैरों के नीचे ही पड़ता है। उसे किसी गलत लोगों का विरोध करने की भी हिम्मत नहीं होता।

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भले ही कोई उसे उसके घर से निकाल दे, लेकिन वो न तो विरोध कर पाता है और न ही इसके लिए कोई कानूनी कदम उठा पाता है। वो सिर्फ और सिर्फ अपने जिन्दगी के बारे में ही सोचता रहता है और ये भी सोचता रहता है कि गलत लोगों के विरुद्ध कोई कदम उठाने पर कहीं वो उसे कोई नुकसान न पहुंचा दे। लेकिन वहीँ यदि बात करें वैसे बच्चों की जिसके अभिभावक बचपन में उनके साथ ज्यादा सख्ती से पेश नहीं आते हैं और उसके साथ मार-पीट भी हिसाब से करते हैं तो वो बच्चे जब बड़े होते हैं तो दुनियादारी समझ आते ही वो खुद होशियार बन जाते हैं। उनमें इतनी हिम्मत तो जरूर होती है कि किसी भी गलत लोगों के खिलाफ कोई एक्शन ले सके। साथ ही ऐसे बच्चे अपने परिवार को सुरक्षित रखने के तरीके भी अच्छी तरह से जानते हैं।

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तो अब ये फैसला आपको खुद करना है कि अपनी हैवानियत का शिकार बनाकर अपने बच्चे और अपने परिवार को बर्बाद कर देना चाहते हैं या फिर सही समय पर सही डिसीजन लेकर और अपने बच्चों के साथ नरमी से पेश आकर उन्हें एक मजबूत इंसान बनाना चाहते हैं। आपका चाहे जो भी फैसला हो लेकिन इतना जरूर ध्यान रखियेगा कि बेवजह हमेशा ही अपने बच्चे को कूटने वाला अपने हाथों से अपने घर का भविष्य खराब तो करता ही है लेकिन साथ ही समाज में खुद को भी कलंकित साबित कर देता है और अपनी इज्जत खो बैठता है।



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