जानिए प्राचीन भारत के 15 बड़े अविष्कार के बारे में, आज दुनिया कर रही है जिनका उपयोग


आज जब भी भारतीयों से पूछा जाता है कि कोई ऐसे अविष्कार या खोज के बारे में बताओ जो भारतीयों ने किए हों, तो ज्यादातर लोग शून्य के अलावा कुछ बता ही नहीं पाते हैं। इसका कारण ये है कि उन्हे अपने देश के बारे में ज्यादातर चीजें पता ही नहीं होती है। आज हम आपको ऐसे 15 अविष्कारों/खोज के बारे में बताएंगे जो भारत में हुए थे और आज पूरी दुनिया में उसका प्रयोग होता है।

भारत में अविष्कृत 15 चीजें:-

अविष्कार
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1) अंतरिक्ष में जाने के लिए या बहुत बड़े Mathematical Calculation को हल करने के लिए शून्य (Zero) की आवश्यकता होती है। इस शून्य का अविष्कार आर्यभट्ट ने किया था। आधुनिक समय में यह विश्व को भारत की सबसे महान भेँट है।

2) चांद पर पानी है या नहीं इसको लेकर वैज्ञानिक संशय (Confused) में थे लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने चांद पर पानी की खोज करके पूरी दुनिया में भारत का नाम रौशन किया।

3) आदिकाल में इंसान जानवरों की खाल को कपड़े के तौर पर पहनता था लेकिन भारतीयों ने हीं पूरी दुनिया को कपास की खेती करना सिखाया। यह अविष्कार सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान हुआ था। सिंधु घाटी के लोगों ने कपास की खेती करके उससे कपड़े बनाने की कला विकसित की और पूरी दुनिया में अपनी इस कला को फैलाया।

4) कपड़ों में बटन का होना बहुत जरूरी चीज होता है। इसका भी अविष्कार भारत में ही हुआ था। मोहनजोदड़ों में बटन का प्रयोग कपड़ों में सजावट के तौर पर होता था।


5) आज पूरी दुनिया शतरंज को दिमाग का खेल मानती है और इसका विश्वकप भी आयोजित होता है। लेकिन इस खेल की शुरूआत 6ठी शताब्दी में गुप्त काल के दौरान हूई थी। पुराने समय में इस खेल को चतुरंगा कहा जाता था।






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6) हममे से लगभग सभी लोगों ने बचपन में लुडो यानि सांप-सीढी का खेल खेला होगा। घर-घर में खेले जाने वाले इस खेल का आविष्कार भी भारत में हुआ था। बाद में यह भारत से इंग्लैंड और अमेरीका पहुंच गया।

7) आज लोग अपनी खुबसूरती बढाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करवाते हैं। बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि प्लास्टिक सर्जरी का अविष्कार भी भारत में ही हुआ था। महान भारतीय वैद्य सुश्रुत युद्ध या प्राकृतिक विपदाओं में जिनके अंग-भंग हो जाते थे या नाक खराब हो जाती थी, तो उन्हें ठीक करने का काम करते थे।

8) कुछ भी लिखने के लिए हमें स्याही की जरूरत होती है। स्याही का अविष्कार भी भारत में हुआ था हालांकि इसको लेकर इतिहासकारों में मतभेद है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसका अविष्कार चीन में हुआ था।

9) आज हम टॉइलट जाते हैं और बाहर निकलते वक्त फ्लश करते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि टॉइलट फ्लश का अविष्कार भी भारत में ही हुआ था। सिंधु घाटी सभ्यता में इसका इस्तेमाल भी किया गया था। तब वहां के ज्यादातर घरों में टॉइलट हुआ करते थे और सारे शहर में अच्छा सीवेज सिस्टम भी था।

10) ऐसा माना जाता है कि भारतीय वैद्य सुश्रुत को मोतियाबिंद हटाना आता था। बाद में यह प्रक्रिया भारत से चीन पहुंची।

11) लोहा और इस्पात की खोज भी भारत ने ही की थी। प्राचीन भारत के लोग लोहा और इस्पात के उपयोग के साथ-साथ धातुविज्ञान में भी अग्रणी थे। पश्चिमी जगत को लोहे का पता चलने के करीब 2 हजार साल पहले से ही भारतीय उच्च-कोटि के इस्पात का उपयोग करते आ रहे थे।


12) हीरे का खनन भी सबसे पहले भारत में ही हुआ था। करीब पांच हजार साल पहले से भारतीय हीरे का इस्तेमाल कर रहे हैं। 18वीं सदी में ब्राजील में पहली बार हीरे की खानों का पता चलने तक भारत ही दुनिया के लिए हीरों के खनन का एकमात्र स्त्रोत देश था।

13) रेडियो, वायरलेस कम्युनिकेशन की खोज भी भारत में ही हुई थी। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मारकोनी को वायरलेस टेलीग्राफी की खोज में उनके योगदान के लिए वर्ष 1909 में भौतिकी के नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। लेकिन इससे करीब 14 साल पहले भारतीय वैज्ञानिक सर जगदीश चन्द्र बोस ने वर्ष 1895 में ही इसका आविष्कार कर लिया था। इतना ही नहीं उन्होंने मारकोनी के ऐसा करने से दो साल पहले ही सार्वजनिक स्तर पर इसका सफलतापूर्वक प्रदर्शन भी कर लिया था। लेकिन उस समय भारत अंग्रेजो का गुलाम था इसलिए उनके इस अविष्कार को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया है।

14) आज जिस फाइबर ऑप्टिक्स का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है उसका सबसे पहला इस्तेमाल भारत में ही हुआ था। भारत में जन्मे डॉ. नरिन्दर सिंह कापानी को फाइबर ऑप्टिक्स टेक्नोलॉजी का पिता कहा जाता है। फोर्ब्स पत्रिका ने ‘गुमनाम नायकों’ की सूची में इन्हें स्थान दिया था।

15) आज मार्केट में तरह-तरह के शैम्पू मौजूद है लेकिन इसका सर्वप्रथम प्रयोग भारत में ही हुआ था। शैम्पू शब्द की उत्पत्ति ‘चम्पू’ शब्द से हुई है। सिर की मालिश के लिए उपयोग में लाए जाने वाले इस तेल की परम्परा बंगाल के नवाबों में 17वीं सदी में शुरू हुई थी। बाद के दिनों में शैम्पू के तौर पर इसका विकास हुआ।

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