जानिए अमृतसर में भीड़ देखकर भी आखिर ट्रेन ड्राइवर ने क्यों नहीं लगाए इमरजेंसी ब्रेक

पंजाब में दशहरा मेला देखने के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में 59 लोगों की मौत हो गई है। अमृतसर में शुक्रवार शाम हुए ट्रेन हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। अभी भी कई लोग अपनों को खोज रहे हैं, पर उनके शव तक नहीं मिल रहे हैं।

ट्रेन की चपेट में आने से 59 लोगों की मौत और कई लोगों के जख्मी होने के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द हृदय विदारक बन गया है। कई परिवार के एकलौते कमानेवाले नहीं रहने से परिवार के लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट है। वहीं कई बच्चों को अपने माता-पिता की तलाश है।

इमरजेंसी ब्रेक
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वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ट्रेन ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक नहीं लगाए अन्यथा इतना बड़ा हादसा नहीं हुआ होता। ड्राइवर ने ऐसा क्यों नहीं किया, इसके लिए हमें ये जानना होगा कि आखिर इमरजेंसी ब्रेक कब और किन परिस्थितियों में लगाए जा सकते हैं।

1) भारतीय ट्रेनों में कौन सा ब्रेक लगा होता है और यह कैसे काम करता है?

भारतीय ट्रेनों में एयर ब्रेक लगा होता है। यह एक पाइप होता है जिसमें उच्च प्रेशर वाली हवा भरी होती है। ये हवा नायलॉन के एक ब्रेक शू को आगे-पीछे करती है। जब भी ट्रेन का ड्राइवर ब्रेक लगाता है तब ब्रेक शू पहिए पर रगड़ खाता है और पहिया रुकने लगता है। (यह ब्रेक शू ट्रेन के सभी पहियों पर लगा होता है।)

2) ट्रेन को कब चलना और कब रुकना है, ये कौन तय करता है?

ट्रेन को अपने हिसाब से चलाने और रोकने का अधिकार ट्रेन के ड्राइवर (लोकोपायलट) के पास नहीं होता है। ड्राइवर हमेशा सिग्नल के मुताबिक़ ट्रेन चलाता है या गार्ड के निर्देश पर।

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3) रेलवे ट्रैक के पास लगे सिग्नल में लगी लाल, हरी और पीली लाइटों का क्या मतलब होता है?

सिग्नल में लगी हरी लाइट का मतलब होता है कि ड्राइवर ट्रेन को अपनी पूरी रफ़्तार से चला सकता है। वहीं पीली लाइट का मतलब होता है कि ट्रेन ड्राइवर को अब ट्रेन की रफ़्तार धीमी करनी है। जबकि लाल लाइट का मतलब है कि लोकोपायलट को हर हाल में ट्रेन उस लाल सिग्नल से पहले रोकना होगा। रेलवे में लाल सिग्नल पार करना गंभीर लापरवाही माना जाता है और ऐसा होने पर जांच होती है और ड्राइवर को सस्पेंड भी किया जा सकता है।

4) ट्रेन ड्राइवर इमरजेंसी ब्रेक कब लगाता है?

ट्रेन ड्राइवर हर उस स्थिति में इमरजेंसी ब्रेक लगा सकता है, जिसमें उसे तुरंत गाड़ी रोकना ज़रूरी लगता हो जैसे कि सामने कुछ आ जाए, पटरी में खराबी दिखे, गाड़ी में कोई खराबी हो।

5) इमरजेंसी ब्रेक कैसे लगता है?

इमरजेंसी ब्रेक उसी लीवर से लगता है जिससे सामान्य ब्रेक लगाया जाता है लेकिन आपातकाल में लीवर को एक तय सीमा से ज़्यादा खींचने पर इमरजेंसी ब्रेक लग जाते हैं।

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6) इमरजेंसी ब्रेक लगाने के बाद क्या ट्रेन उसी वक्त रुक जाती है?

नहीं। इमरजेंसी ब्रेक लगाने के बाद ट्रेन कुछ दूर तक जाने के बाद ही रूक पाती है। ये निर्भर करता है कि ट्रेन किस टाइप की है। अगर एक्सप्रेस ट्रेन है और अपनी पूरी स्पीड से चल रही है तो इमरजेंसी ब्रेक लगाने पर भी वह 800 से 900 मीटर तक जाने के बाद ही रूकती है। अगर वह मालगाड़ी है तो उसमे लदे माल पर निर्भर करता है। हालांकि मालगाड़ी भी 1100-1200 मीटर तक जाने के बाद ही रूक पाती है। जबकि अगर डेमू ट्रेन हो तो उसे भी रुकने के लिए कम से कम 625 मीटर की दूरी चाहिए होती है।

हाल ही में अमृतसर हादसे के वक्त डेमू ट्रेन ही वहां से गुजरी थी। अमृतसर में हादसे वाली जगह पर फैले धुएं के कारण जब तक ट्रेन ड्राइवर को भीड़ दिखी तब तक इमरजेंसी ब्रेक लगाने का समय नहीं रह गया था। हालांकि ड्राइवर ने स्पीड कम कर दी थी लेकिन हादसा हो चुका था।



7) अचानक गाड़ी के सामने किसी के आ जाने पर लोकोपायलट Emergency Break लगाकर ट्रेन क्यों नहीं रोकता है?

जैसा कि पिछले सवाल में हमने बताया कि ट्रेन को एक निश्चित स्थान से पहले रोकने के लिए कम से कम 625 मीटर पहले इमरजेंसी ब्रेक लगाना होगा। अब अगर अचानक कोई इंसान या जानवर ट्रेन के सामने आ जाए तो भी इमरजेंसी ब्रेक लगाकर उसे बचाने का समय नहीं रहता है। इसलिए ऐसी परिस्थिति में लोकोपायलट ब्रेक न लगा कर ट्रेन को पहले की तरह ही चलाते रहते हैं।

8) क्या इमरजेंसी ब्रेक लगाने से ट्रेन पलट जाती है?

नहीं, ऐसा कुछ नहीं होता है। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ असोसिएशन और रीसर्च डेवलपमेंट स्टैंडरडाइज़ेशन ऑर्गनाइज़ेशन (आरडीएसओ; भारतीय रेल में तकनीकी रीसर्च करने वाला संस्थान) ने बहुत पहले ही यह बता दिया था कि इमरजेंसी ब्रेक लगाने से ट्रेन को कोई नुक्सान नहीं होता है और न ही वो पटरी से उतरती है। संसथान के मुताबिक़, गाड़ी पटरी से तभी उतरती है जब या तो पटरी में खामी हो या फिर गाड़ी में कोई तकनीकी खराबी हो। इमरजेंसी ब्रेक इसलिए ही दिया जाता है कि ज़रूरत के वक्त ट्रेन को कम से कम समय में सुरक्षित तरीके से रोका जा सके।


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