जानिए छठ महापर्व से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य

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छठ महापर्व हिन्दू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। पहले यह त्यौहार भारत के कुछ ही राज्यों में मनाया जाता था लेकिन अब धीरे-धीरे यह त्यौहार पूरे देश में आस्था का प्रतीक बन गया है और अब पूरे देश में इस त्योहार को बहुत ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। आज हम छठ महापर्व से सम्बंधित कुछ जरुरी बातें आपको सवाल-जवाब के जरिए संक्षिप्त में बताएंगे।

छठ महापर्व की महत्वपूर्ण बातें

छठ महापर्व
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1) छठ पूजा का त्यौहार कब मनाया जाता है?

छठ पूजा का त्यौहार साल में दो बार मनाया जाता है। एक चैत्र में और और दूसरा कार्तिक मास में।

2) छठ पूजा में किस देवी-देवता की पूजा की जाती है?

छठ पूजा में षष्ठी देवी और सूर्य देवता की पूजा की जाती है।

3) छठ पूजा मुख्य रूप से किन राज्यों में मनाया जाता है?

छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, उत्तरप्रदेश, झारखंड, बंगाल और और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है।

4) यह पूजा कितने दिनों तक चलती है और इसमें कौन-कौन से नियम होते हैं?

छठ पूजा चार दिनों तक चलती है जिसमे आखिरी 36 घंटे तक व्रती को बिना भोजन-पानी ग्रहण किए व्रत रखना होता है। इसके अलावा इसमें व्रती को मुख्य रूप से चार नियमों का पालन करना होता है। पहले दिन नहाय-खाय होता है जिसमे व्रती को घर की सफाई करने के बाद शुद्ध शाकाहारी भोजन करना होता है।

दूसरे दिन खरना होता है जिसमे व्रती पुरे दिन उपवास रख कर शाम को बिना नमक, चीनी, प्याज और लहसुन का शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं।


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तीसरा दिन संध्या अर्ध्य का दिन होता है। इस दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाकर बांस की टोकरी में रखा जाता है और नजदीकी नदी या तालाब के पास जाकर डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है।

चौथे दिन भी तीसरे दिन की ही प्रक्रिया दोहराई जाती है लेकिन उस वक्त उगते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है। उसके बाद ही व्रत खोला जाता है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमे डूबते और उगते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है।

5) छठ पूजा का व्रत रखने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?

मान्यताओं के अनुसार यह व्रत संतान की प्राप्ति और सलामती के लिए किया जाता है। इसके अलावा कुछ लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर भी छठ पूजा का व्रत रखते हैं। यह व्रत स्त्री और पुरुष दोनों ही कर सकते हैं।

6) छठ पूजा की प्रचलित लोक कथाएं कौन सी हैं?

एक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुनः अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था।

एक अन्य मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्यदेव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। वह प्रतिदिन घण्टों कमर तक पानी में ख़ड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देते थे। सूर्यदेव की कृपा से ही वे महान योद्धा बने थे। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है।

कुछ कथाओं में पांडवों की पत्नी द्रौपदी द्वारा भी सूर्य की पूजा करने का उल्लेख है। वे अपने परिजनों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना और लम्बी उम्र के लिए नियमित सूर्य पूजा करती थीं।

एक कथा के अनुसार राजा प्रियवद को कोई संतान नहीं थी, तब महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराकर उनकी पत्नी मालिनी को यज्ञाहुति के लिए बनायी गयी खीर दी। इसके प्रभाव से उन्हें पुत्र हुआ परन्तु वह मृत पैदा हुआ। प्रियवद पुत्र को लेकर श्मशान गये और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे।

उसी वक्त ब्रह्माजी की मानस कन्या देवसेना प्रकट हुई और कहा कि सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती हूँ। हे! राजन् आप मेरी पूजा करें तथा लोगों को भी पूजा के प्रति प्रेरित करें। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी।


7) छठ पूजा का सकारात्मक पहलू क्या है?

यह एक ऐसा त्यौहार है जिसमे पूरे समाज और नगर के लोगों की भागीदारी होती है। इस त्यौहार में लोग अपने घर, मोहल्ले और गाँव की सफाई करते हैं। इसके अलावा पूजा के दौरान आपसी भेद-भाव, अमीरी-गरीबी भुला कर नदी-तालाब के पास जमा होते हैं और एक साथ सूर्य देव को अर्ध्य देते हैं। इस तरह यह पर्व समाज से जातिगत भेद-भाव और छुआ-छूत को कुछ समय के लिए ही सही लेकिन ख़त्म जरूर कर देता है।

8) छठ पूजा को और किन-किन नामों से जाना जाता है?

छठ पूजा को छठ, छठी माई के पूजा, छठ पर्व, छठ पूजा, डाला छठ, डाला पूजा, सूर्य षष्ठी, छठ महापर्व, हर छठ और ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है।

**आप सभी को छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं**

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