क्या आप जानते हैं क्यूँ नहीं की जाती है ब्रह्मा जी की पूजा

हम हमेशा से सुनते आ रहे हैं कि सृष्टि के रचयिता ब्रम्हा जी है। हिन्दू धर्मग्रन्थों में लिखा भी हुआ है कि ब्रह्मा जी ने इस पूरे ब्रह्माण्ड को बनाया है और विष्णु भगवान इस जगत की जीवों का पालन करते हैं जबकि भगवान शिव जीवों को उनके कर्मों के अनुसार मोक्ष प्रदान करते हैं।

ये बातें पढने के बाद सभी के मन में एक शंका उठती है कि भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा सभी करते हैं लेकिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की पूजा कोई क्यूँ नही करता? यहाँ तक कि उनके मंदिर में कहीं दिखाई नही देते। आपके मन में भी ये सवाल उठते होंगे। इन सबके पीछे एक कहानी है, आइये जानते हैं वो कहानी।

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क्यूँ नहीं की जाती है ब्रह्मा जी की पूजा

ऐसा कहा जाता है कि एक बार ब्रह्मा जी ने धरती और धरती के लोगों की भलाई करने के लिए यज्ञ करने के बारे में सोचा। यज्ञ करने के लिए धरती पर सही स्थान का चुनाव करने के लिए उन्होने अपने कमल को धरती लोक पर भेज दिया। इसके बाद ब्रह्मा जी द्वारा तीन बूंदे धरती पर फेंकी गयी जिसमे एक बूँद पुष्कर मे गिरी और इस स्थान का चुनाव करके ब्रह्मा जी वहां पहुचे जहा बूँद गिरी थी।

Brahma ji ki puja kyu nahi ki jati hai

ब्रह्मा जी तो वहाँ जल्दी पहुँच गए लेकिन उनकी पत्नी सावित्री समय पर नही पहुच पाई। ऐसे में ब्रह्मा जी को चिंता हो गई कि पत्नी के बिना यज्ञ नहीं किया जा सकता और अगर सही समय पर यज्ञ शुरू नही हुआ तो उस यज्ञ का कोई फायदा नही होगा। जब देर होने लगा तो उन्होने यज्ञ करने की ठान ली लेकिन यज्ञ करने के लिए एक स्त्री की ज़रूरत थी। तब ब्रह्मा जी ने पुष्कर की एक ग्वाल बाला से शादी कर ली और उसके साथ यज्ञ मे बैठ गये।


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अभी यज्ञ शुरू होने ही वाला था कि तभी ब्रह्मा जी की पत्नी देवी सावित्री वहाँ पहुँच गयी और अपनी जगह किसी और औरत को देख कर उन्हे गुस्सा आ गया। गुस्से में उन्होने ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया की इस पृथ्वी लोक मे आप की कहीं पूजा नही की जाएगी। ब्रह्मा जी को अपनी गलती का अहसास था इसलिए उन्होने देवी सावित्री से माफी माँगी तब उन्होने माफ करते हुए कहा की जहाँ पर जल की बूँद गिरी थी सिर्फ़ उसी जगह आपका मंदिर होगा और अगर कोई दूसरा आपका मंदिर बनाएगा तो उसका विनाश हो जायगा।

यहीं कारण हैं कि सिर्फ़ पुष्कर में हीं ब्रह्मा जी की पूजा की जाती है। ब्रह्मा जी का ससुराल होने के कारण पुष्कर में उनकी पूजा धुमधाम से होती है और हर साल पुष्कर में बहुत बड़ा मेला लगता है।





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