चीनी प्रॉडक्ट्स का बहिष्कार कर दें तो नाक रगड़ने पर मजबूर होगा चीन: बाबा रामदेव


पिछले कुछ दिनों से डोकलाम के मुद्दे पर भारत और चीन के बीच तनातनी चल रही है। डोकलाम में भारतीय और चीनी सेना आमने-सामने है। चीन बार-बार भारत को डोकलाम से अपनी सेना हटाने को कह रहा है जबकि भारत भी पीछे हटने को तैयार नही है। ये पहली बार नहीं है जब भारत और चीन के बीच तनाव ऐसा हुआ है।

दोनों देशों के बीच इस तनाव पर योग गुरू बाबा रामदेव ने एक उपाय बताया है। बाबा रामदेव ने दावा किया है कि अगर सभी भारतवासी उनके बताये हुए उपाय को करें तो चीन नाक रगड़ने पर मजबूर हो जाएगा। पतंजलि के अपने देशी प्रॉडक्ट्स के जरिए घर-घर में अपनी पहचान बना चुके योग गुरु ने भारत के बाजार पर कब्जा जमाए हुए चीनी प्रॉडक्ट्स का बहिष्कार करने की सलाह दी है।

क्या कहा बाबा रामदेव ने

बाबा रामदेव
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बाबा रामदेव ने कहा कि भारत के विशाल बाजार में अपने सामान भेजकर चीन हमसे अरबों डॉलर कमा रहा है अगर हम अपने बाजार को चीन के खिलाफ हथियार बना दें तो चीन की सारी हेकड़ी निकल जाएगी और ऐसा हुआ तो चीन निश्चित तौर पर अपने कदम पीछे खींच लेगा। हालांकि चीनी प्रॉडक्ट्स का बहिष्कार का आह्वान लंबे समय से हो रहा है लेकिन भारत में ज्यादातर लोगों को इन सबसे कोई मतलब नही होता है। ऐसे लोगों को सस्ते या फ्री का ऑफर दे दिया जाए तो वो ये नही देखते कि सामान मेड इन चाइना है या मेड इन भारत।






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हालांकि अचानक से चीनी सामानों का बहिष्कार करने से हम भारतीयों की समस्याएं हीं बढेंगी क्यूँकि बड़े-बड़े मशीनों से लेकर हमारे घरों में लगने वाले एलईडी बल्ब तक चीन में निर्मित होकर आते हैं या वहाँ से इसके कल-पूर्जे मँगाकर यहाँ बनाए जाते हैं। यहाँ तक कि दवाईयों में प्रयोग होने वाले केमिकल्स भी चीन से हीं मँगवाए जाते हैं। ऐसे में अगर हम चीनी सामानों का पूर्ण बहिष्कार कर दें तो अचानक से हमारे देश में इन संसाधनों की कमी हो जाएगी जिसके फलस्वरूप महँगाई बहुत तेजी से बढेगी।

क्या कहते हैं आँकड़े

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भारत एक ऐसा देश है जहाँ प्याज, दाल या टमाटर महँगे हो जाएं तो लोग सरकार गिराने की बात करने लगते हैं ऐसे में चीनी सामानों की गैरमौजूदगी में जब जरूरत की सभी चीजें महँगी हो जाएंगी तो देश में हालात बहुत बेकाबू हो जाएंगे। अगर आँकड़ों की नजर से देखा जाए तो भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा पिछले साल बढ़कर 46.56 बिलियन डॉलर (3 लाख करोड़ रुपए) तक जा पहुंचा। चीन का भारत में निर्यात पिछले वित्त वर्ष 58.33 बिलियन डॉलर था। 2015 के मुकाबले निर्यात में 0.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। दूसरी तरफ भारत का चीन में निर्यात 12 प्रतिशत गिरकर 11.76 बिलियन डॉलर तक जा पहुंचा। दो देशों के बीच आयात और निर्यात का अंतर ही व्यापार घाटा होता है।

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व्यापार घाटे का मतलब ये हुआ कि हम चीन से हर साल ज्यादा से ज्यादा सामान खरीद रहे हैं जबकि चीन को हमारे सामान की सप्लाई लगातार कम हो रही है। इसलिए चीनी प्रॉडक्ट्स बहिष्कार करने के साथ-साथ हमे अपने देश में उस प्रॉडक्ट्स को बनाना भी शुरू करना होगा। जब तक हम अपने देश में सभी जरूरी सामानों को बनाना शुरू नही करते हैं तब तक चीनी प्रॉडक्ट्स का पूरी तरह से बहिष्कार संभव नही हो पाएगा।

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हालांकि हम इतना तो कर हीं सकते हैं कि हमारे दैनिक जीवन की जरूरत की जो चीजें भारत में बनी हुई हैं उसका ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें। हमारे ऐसा करने से इन प्रॉडक्ट्स का चीनी संस्करण का भारत में आयात बन्द या कम हो जाएगा जिससे चीन को आंशिक तौर पर हीं सही नुकसान तो उठाना पड़ेगा। बदलाव अचानक नही आता है लेकिन इस बदलाव की शुरूआत कभी न कभी तो करनी ही पड़ती है। चीन के खिलाफ हमे इसी शुरूआत की जरूरत है। चीनी सामानों का यथासंभव बहिष्कार करें।

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