बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को बीजेपी ने बनाया राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार

नई दिल्ली: बीजेपी और विपक्षी पार्टियों के बीच राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर चल रही खींचातानी को सोमवार को उस वक्त विराम लग गया जब बीजेपी ने एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया। भाजपा ने वर्तमान में बिहार के गवर्नर रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कोविंद के नाम का ऐलान करते हुए बताया कि कोविंद के बारे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह को जानकारी दे दी गई है। अमित शाह ने कहा कि, पार्टी ने गरीब समाज से ताल्लुक रखने वाले शख्स को राष्ट्रपति बनाने का फैसला किया है।

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कई दिनों से चल रहे अटकलों में कोविंद का नाम कहीं नही था ऐसे में रामनाथ कोविंद के नाम का ऐलान करके भाजपा ने राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया है। माना जा रहा है कि कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने राजनीतिक दांव खेला है क्यूँकि दलित चेहरा होने की वजह से शायद हीं कोई पार्टी कोविंद का विरोध करेगी।

कौन हैं रामनाथ कोविंद?

रामनाथ कोविंद
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रामनाथ कोविंद उत्तरप्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में हुआ था। कानपुर यूनिवर्सिटी से बी कॉम. और एल. एल. बी. करने वाले रामनाथ कोविंद बीजेपी दलित मोर्चा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे 1994 से 2006 तक यूपी से दो बार राज्यसभा सांसद भी चुने जा चुके हैं। कई संसदीय कमेटियों के चेयरमैन भी रह चुके कोविंद पेशे से वकील भी रहे हैं। अभी वर्तमान में वे बिहार के राज्यपाल के पद पर हैं।

टीआरएस ने दिया समर्थन

रामनाथ कोविंद
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तेलंगाना के सीएम और टीआरएस चीफ केसी राव ने कोविंद का समर्थन करने का ऐलान कर दिया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के सीएम पलनिसामी से बातचीत करके कोविंद का नाम फाइनल करने की जानकारी दी। वहीं, वेंकैया नायडू ने बीजेपी के सीनियर नेताओं आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को कोविंद का नाम ऐलान होने से पहले फैसले के बारे में बताया।

इससे पहले बीजेपी की संसदीय मीटिंग में यह फैसला लिया गया कि राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार कोई सक्रिय राजनीतिक व्यक्ति ही होना चाहिए। 45 मिनट तक चले इस मीटिंग में बीजेपी के सभी सांसद और विधायक उपस्थित थे। अब देखना ये है कि नरेन्द्र मोदी के इस राजनीतिक दांव पर कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियां क्या रूख अपनाती है।



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