बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार से की तेजस्वी यादव को पद से हटाने की मांग

बिहार विधानसभा 2015 के चुनाव में हार के बाद अचानक से गायब हो गये बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी लम्बे अरसे के बाद सामने आये हैं। आते ही उन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से तेजस्वी प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री के पद से हटाये जाने की मांग की है। उन्होंने नीतीश कुमार की चुप्पी पर भी प्रश्न साधते हुए कहा कि जब मुझे 5 दिनों के भीतर मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया था तो फिर तेजस्वी यादव को क्यों नहीं किया जा रहा?

कौन हैं जीतन राम मांझी और जदयू से इनका कितना गहरा सम्बन्ध है?

2014 में जब लोकसभा के चुनाव में भाजपा की भारी जीत हुई थी और उसमें कांग्रेस, जदयू और राजद जैसे पार्टियों की हार हो गयी थी तो उस समय बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसी वजह से अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया और अपने दल के विधायक जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री के पद पर नियुक्त कर दिया था और इसके बाद ही उन्होंने राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन किया। लेकिन हालात कुछ ऐसे बने कि फरवरी 2015 में जीतन राम मांझी को उनके पद से हटाकर फिर से नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के पद पर आसीन होना पड़ा।

Bihr CM Nitish Kumar and Jitan Ram Manjhi
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लेकिन नीतीश कुमार के द्वारा उन्हें उनके पद से हटाया जाना मांझी को बहुत ही बुरा लगा और उन्होंने जदयू को छोड़कर अपनी एक अलग पार्टी हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा ( हम ) का गठन किया और भाजपा से मिल गए। फिर इसके बाद जब 2015 में बिहार विधानसभा का चुनाव हुआ तो इसमें महागठबंधन की भारी जीत हुई और भाजपा को हार का सामना करना पड़ा जिसके बाद से जीतन राम मांझी मीडिया की चर्चाओं से लगभग गायब ही हो गए। लेकिन अब जब लालू यादव और उनके परिवार पर आरोप-पर-आरोप लगाये जा रहे हैं तो इस स्थिति को अपने स्थिति से तुलना करके वो तेजस्वी यादव को पद से हटाये जाने की मांग कर रहे हैं।

जीतन राम मांझी ने तेजस्वी यादव को पद से हटाये जाने की मांग क्यों की?

ये घटना 2005 की ही है, जब नीतीश कुमार नए-नए बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और उनके मंत्रिमंडल में जीतन राम मांझी के नाम भी शामिल किये गए थे। लेकिन जैसा कि स्पष्ट है, नीतीश कुमार शुरुआत से ही उसूल के पक्के रहे हैं और उन्होंने हर संभव प्रयास किया है कि भ्रष्टाचारी मंत्रियों को उनके मंत्रिमंडल में सीट न मिले। लेकिन 90 के दशक में राजद के कार्यकाल में शिक्षामंत्री के पद पर आसीन जीतन राम मांझी पर 2005 में भ्रष्टाचार के आरोप लगाये जा रहे थे जिस वजह से हंगामा होने के 5 दिन के अन्दर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मांझी से इस्तीफ़ा ले लिया था।

Jitan Ram Manjhi
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लेकिन इस्तीफ़ा लिए जाने के बाद जीतन राम मांझी अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोप से मुक्त हो गए और जिससे नीतीश कुमार ने उन्हें ससम्मान फिर से अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया था। लेकिन आज उस घटना के 12 वर्ष बीत जाने के पश्चात जब वैसी ही घटना उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ घटित हो रही है तो नीतीश कुमार अपने पुराने प्रक्रिया को दोहराने के बजाये इस पर चुप्पी साधे हुए हैं जो मांझी को बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने उनसे उनके पुराणी प्रक्रिया को दोहराते हुए ऐसी मांग कर दी है।

बता दें कि अभी तेजस्वी यादव के खिलाफ सिर्फ एफआईआर दर्ज हुई है जिससे उनके दोषी होने या न होने का फैसला नहीं किया जा सकता है। और वैसे भी राजद और लालू यादव का कहना है कि ये मामला भ्रष्टाचार का न होकर राजनीतिक द्वेष का है और उनके खिलाफ एक बहुत बड़ी साजिश के तहत एफआईआर किया गया है। तो ऐसे में जदयू के लिए कोई भी फैसला लेना जल्दबाजी ही मानी जाएगी।

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