बिहार: मैट्रिक के स्टेट टॉपर से बोर्ड ने पूछे थे 40 सवाल, जानिये फिर क्या हुआ

जानिये क्या है बिहार बोर्ड का ये पूरा मामला?

बिहार बोर्ड के 10th का रिजल्ट प्रकाशित हो चुका है और लगभग आधे स्टूडेंट्स इसमें फेल हो गए। उनमें से सिर्फ 14% बच्चे ही फर्स्ट डिवीज़न पाने में सफल हो पाए। लेकिन यदि बिहार के आधे स्टूडेंट्स फेल हुए हैं तो वहीँ इसके टॉपर्स ने भी बहुत ही बेहतरीन नंबरों के साथ अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन इससे पहले पूरे इंडिया में प्रसिद्ध हो चुके बिहार टॉपर घोटाले पर इस बार बिहार बोर्ड ने बहुत ही बड़ा एक्शन लिया था जिस वजह से इन टैलेंटेड स्टूडेंट्स को बहुत ही कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा था।

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लेकिन इन प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स ने न सिर्फ “सांच को आंच कहाँ” वाली कहावत को चरितार्थ कर दिखाया बल्कि ये भी साबित कर दिया कि यदि इंसान कड़ी-से-कड़ी मेहनत करे तो उसे ऊँचाई पर पहुँचने से कोई रोक नहीं सकता। जिस तरह से पिछले साल 2016 से टॉपर घोटाले की करतूत सामने आ रही थी इस वजह से दूसरे राज्यों में बिहार की बहुत ही बड़ी बदनामी होने लगी थी जिस वजह से बिहार बोर्ड ने एक बहुत ही ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाते हुए पहली बार रिजल्ट प्रकाशित करने से पहले ही मैट्रिक के टॉपर्स के प्रतिभा को चेक किया ताकि यदि इसमें भी कोई घोटाला की गयी हो तो समय रहते ही उसे सुधार दिया जाए जिससे बिहार की बदनामी न हो।

Bihar matric topper Prem Kumar
Image Source :- www.bhaskar.com

इसी प्रक्रिया के तहत बिहार बोर्ड ने मैट्रिक के स्टेट टॉपर प्रेम कुमार को कुछ दिन पहले ही पटना बुलाकर उनसे बिहार बोर्ड के चेयरमैन आनंद किशोर और सेक्रेट्री के सामने ही सभी विषयों से सम्बंधित कुल 40 सवाल पूछा जिसमें प्रेम कुमार सरलतापूर्वक और आसानी से पास हो गए। इतना ही नहीं, बेहतर परिणाम के लिए उनके एग्जाम वाले कॉपी को भी रीचेक किया गया और उससे उनके हैण्डराइटिंग का भी मिलान किया गया जिसमें प्रेम कुमार बिल्कुल ही योग्य पाए गए।

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हालांकि बोर्ड के इस रवैये से प्रेम कुमार कुछ शॉक जरूर हुए होंगे और उन्हें परेशानियों का सामना जरूर करना पड़ा होगा लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यदि रिजल्ट के प्रकाशित होने के बाद उनपर या किसी और पर उंगली उठाया जाता तो वो इस परेशानी से हजारों गुना बड़ा होता। थोड़ी देर के लिए उन्हें इससे कष्ट जरूर पहुंचा लेकिन बोर्ड का ये कदम बिल्कुल ही सही था और ये बोर्ड के साथ-ही-साथ टॉपर्स के भी हित में था।

A beautiful building
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बताते चलें कि पिछले साल बिहार के इंटर के रिजल्ट में बहुत ही बड़ा घोटाला किया गया था और अयोग्य स्टूडेंट्स को टॉपर बना दिया गया था। इसमें रूबी सिंह का मामला बहुत ही जोरों पर था और इस सबकी वजह बिहार बोर्ड के पूर्व डायरेक्टर लाल्केश्वर प्रसाद सिंह को पाया गया था जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद जब उनके बाकी के रिकार्ड्स को चेक किया गया तो उनसे सम्बंधित सारे घोटाले और अपराधों का खुलासा हुआ। इसके बाद फिर इस साल इंटर आर्ट्स के टॉपर गणेश के योग्यता पर भी सवाल उठने लगा जिसे सही पाया गया। इसलिए बिहार बोर्ड को इस बार मैट्रिक में ऐसा कदम उठाना पड़ा।

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