जानिये भारत के कुछ अजीबोगरीब क़ानून के बारे में

हमारे देश भारत को दुनिया का सबसे मजबूत लोकतांत्रिक देश माना जाता है। लेकिन इन सभी के बावजूद भारत में कुछ ऐसे क़ानून भी हैं जो बहुत ही अजीब तरह के हैं और इसके बारे में सभी देशों में चर्चा होती रहती है। जिन कानूनों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं उनमें से कुछ तो अंग्रेजों के शासनकाल में ही बनाये गए थे जबकि कुछ आजादी के बाद भी बनाये गए हैं। हालांकि एक नजरिये से देखा जाये तो ये क़ानून सही भी हैं लेकिन एक-बारगी कोई भी इसे जानकर हैरान हो सकता है।

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1) आत्महत्या का क़ानून

आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि किसी भी इंसान का उसके शरीर पर पूरा अधिकार होता है लेकिन भारत के दंड संहिता की धारा 309 के अनुसार किसी भी इंसान के शरीर पर उसके अभिभावक का भी हक़ होता है। इसलिए भारत में किसी को भी आत्महत्या करने का अधिकार नहीं है। यदि कोई ऐसा प्रयत्न करता है और इसमें विफल हो जाता है तो उसे जेल की हवा भी कहानी पड़ सकती है। हालांकि ये क़ानून एक तरह से सही भी है लेकिन लोकतंत्र की परिभाषा पर ये खरा नहीं उतरता है।

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2) वयस्कता सम्बन्धी क़ानून

भारतीय वयस्कता अधिनियम 1875 के तहत कोई भी लड़का 21 साल की उम्र से पहले नाबालिग माना जाता और इस उम्र तक शादी नहीं कर सकता है। 21 साल के होने के बाद ही किसी लड़के की शादी की जा सकती है लेकिन यदि वो बाप बनना चाहे तो 18 साल की उम्र के बाद ही किसी बच्चे को गोद लेकर बाप बन सकता है। एक नजरिये से इस क़ानून में भी कोई कमी नहीं है लेकिन सुनने में थोडा अजीब जरूर लगता है।

3) नौकरी संबंधी क़ानून

वित्तमंत्री के आदेशानुसार किसी भी बैंक में नौकरी पाने के लिए ग्रेजुएट होना अनिवार्य है। तो ऐसे में ये बात कुछ पचता नहीं कि वित्तमंत्री बनने के लिए तो कोई शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं है तो फिर भला बैंक में मामूली से पद के लिए भी ग्रेजुएट होना क्यों जरूरी है?

Indin job law
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4) शराब सम्बन्धी क़ानून

भारत के विभिन्न राज्यों में शराब बेचने, खरीदने और पीने को लेकर अलग-अलग क़ानून हैं जो वहां के मुख्यमंत्री द्वारा बनाये जाते हैं। इनमें से कुछ राज्यों में तो शराब पीना और बेचना पूरी तरह से प्रतिबंधित है तो कुछ राज्यों में 18 साल, कुछ में 21 साल तो कुछ राज्यों में कम-से-कम 25 साल के व्यस्क ही शराब पी सकते हैं। हालांकि ये क़ानून उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा बनाये गए हैं लेकिन ये सोचने वाली बात है कि क्या इससे समानता के अधिकार को ठेस नहीं पहुँचता है?

5) मुद्रा सम्बन्धी क़ानून

भारतीय खजाना निधि अधिनियम 1878 के अंतर्गत यदि आपको सड़क पर 10 रूपया या इससे अधिक मूल्य की राशि पड़ा हुआ मिले तो इसे इसके असली मालिक तक पहुँचाना होगा। यदि आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो इस राशि को अपने निकट के पुलिस स्टेशन में जमा करना होगा और इसकी विस्तृत जानकारी भी देना होगा।

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