यूपी पुलिस की कार्रवाई से दहशत में अपराधी, बेल कैंसिल करा कर जा रहे हैं जेल

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने सत्ता संभालते हीं पुलिस को जो खुली छूट दी थी अब उसका परिणाम सामने दिखने लगा है। पिछले सात महीनों में यूपी पुलिस ने साढ़े चार सौ मुठभेड़ों में 20 अपराधियों को मार गिराया है साथ हीं ढाई हजार से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि इस कार्रवाई में 2 पुलिस अधिकारी शहीद हुए हैं जबकि 90 से ज्यादा पुलिसवाले घायल हुए हैं। सत्ता बदलने के बाद पुलिस में आए इस बदलाव से अपराधियों में दहशत का माहौल है।

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स्थिति ये हो गई है कि लखनऊ से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के अपराधी अपनी जमानत रद्द करवाकर वापस जेल जा रहे हैं। कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने जमानत मिलने के बाद भी जेल से निकलने से इनकार कर दिया है। ऐसे भी अपराधी हैं जिन्होंने अपनी पैरोल कैंसिल करवा ली है। कानून से न डरने वालों में पैदा हुए खौफ की यह तस्वीर हाल ही में यूपी पुलिस द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में साफ दिख रही है।

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वैसे तो ये खौफ पूरे प्रदेश के अपराधियों में है लेकिन सबसे ज्यादा मामले पश्चिमी यूपी के हैं। डीजीपी मुख्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, योगी सरकार आने के बाद से 86 अपराधियों ने अदालत में सरेंडर किया है। इनमें से अधिकतर ने पिछले 2 महीने में सरेंडर किया है जिनमें 9 ऐसे इनामी अपराधी हैं, जो अपनी जमानत तुड़वाकर वापस जेल चले गए हैं। ऐसे अपराधियों में से अधिकतर बुंलदशहर और मुजफ्फरनगर जैसे पश्चिमी यूपी के जिलों से हैं। बता दें कि पुलिस और अपराधियों में पश्चिमी यूपी में ही सबसे ज्यादा मुठभेड़ हुई हैं।

अपराधी कर रहे हैं दूसरे राज्यों में सरेंडर

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कई बड़े और इनामी अपराधी ऐसे हैं जो अपनी जान बचाने के लिए यूपी से निकल कर दूसरे राज्यों में भाग गए हैं। पश्चिमी यूपी का खौफ कहे जाने वाले बिल्लू दुजाना ने हाल ही में दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत में सरेंडर किया। दर्जनों आपराधिक मामलों वाले मेरठ के अमित जाट ने सोनीपत में, वहीं हरियाणा के बिट्टू ने रोहतक में सरेंडर किया है। पुलिस के अनुसार, यूपी के कई इनामी अपराधियों ने जयपुर की अदालत में भी सरेंडर किया है।

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पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार

– 86 अपराधियों ने दूसरे राज्यों में सरेंडर किया। इनमें बरेली जोन के पांच, मेरठ जोन के 67, वारणसी-चंदौली का एक, कानपुर जोन के 11 और इलाहाबाद के दो अपराधी हैं।

– 15 अपराधी जमानत के बाद भी बाहर नहीं आए। इनमें बदायूं के चार, कानपुर देहात, कानपुर नगर, गोरखपुर व बस्ती के तीन-तीन, अमरोहा के दो, बरेली, इटावा, लखनऊ-उन्नाव का एक-एक अपराधी है।

– 9 अपराधी जमानत रद्द करवाकर जेल गए। इनमें संभल से एक, बुलंदशहर से तीन, गौतमबुद्धनगर से एक, हापुड़ से एक और मुजफ्फरनगर से तीन हैं।


बता दें कि ये डीजीपी मुख्यालय से मिले ये आंकड़े मार्च से अक्टूबर 2017 के बीच के हैं। अपराधियों से निपटने में खुली छूट दिए जाने से पुलिस के हौंसले बुलंद है। इसीलिए पुलिस प्रो-एक्टिव रणनीति पर काम कर रही है। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई मौकों पर साफ कर चुके हैं कि अगर कोई पुलिस पर गोली चलाएगा तो पुलिस हाथ बांधे नहीं बैठे रह सकती।

कुल मिलाकर यूपी पुलिस की कोशिश यही है कि राज्य के लोगों को भयमुक्त बनाने के लिए अपराधियों के दिलों में पुलिस की ज्यादा से ज्यादा दहशत भरी जाए और वर्तमान स्थिति को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि यूपी पुलिस इस काम में बहुत हद तक कामयाब भी रही है।

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